केएम राज, जमालपुर (मुंगेर) : महाभारतकालीन जमालपुर की ऐतिहासिक काली पहाड़ी जल्द ही पर्यटन के मानचित्र पर दिखेगी। जिला प्रशासन की ओर से इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। काली पहाड़ी में बनी नहर में नौका विहार होगा। नक्शा और भूमि सर्वे का काम शुरू हो गया है। काली पहाड़ी नहर व वाटर फिल्टर नहर में नौकायान की तैयारी है। जिला प्रशासन इसकी पूरी डीपीआर बनाकर पर्यटन विभाग को भेजेगा। प्राचीन काली पहाड़ी को पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद जमालपुर में रोजगार का सृजन ही नहीं होगा, बल्कि सैकड़ों हाथों को रोजगार भी मिलेगा। सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।

1950 फीट भूमि मापी का काम पूरा

नगर परिषद क्षेत्र में बनने वाले नौका विहार पर बड़ी राशि खर्च होगी। इसकी रिपोर्ट भी जिलाधिकारी के माध्यम से पर्यटक विभाग को भेजी जाएगी। इस प्रोजेक्ट में 12 से 13 बीघा भूमि की जरूरत है। 1950 फीट भूमि मापी का कार्य अंचल के अमीन संजय कुमार, सीआइ रमेश प्रसाद की देखरेख में पूरा कर लिया गया है। शेष भूमि मापी का काम भी नक्शे के आधार पर हो रहा है।

पहाड़ी और गंगा पानी से चलेगी नौका

पर्यटक के क्षेत्र में विकसित होने वाले जमालपुर काली पहाड़ी नहर में नौकायान का सफल संचालन में गंगा का पानी व पहाड़ से निकलने गिरने वाले झरना के पानी को संचय कर इसे जमीनी रूप दिया जाना है। पर्यटन ²ष्टि से यह योजना किसी भी तरह फेल नहीं हो इसको लेकर गंगा नदी से पाइप लाइन के जरिए जो पानी रेलवे व पेयजल आपूर्ति योजना के लिए लाए जा रहे पानी का इस्तेमाल होगा।

  • -जिला प्रशासन की ओर से शुरू कर दी गई कवायद
  • -पर्यटन स्थल के लिए नक्शा व स्थल का सर्वे हुआ शुरू
  • -काली पहाड़ी नहर व वाटर फिल्टर नहर में नौकायान की तैयारी

रोजगार के बढ़ेंगे अवसर, राजस्व पर असर

नौका विहार शुरू होने से पर्यटक पहुंचेंगे। रोजगार के अवसर बढ़ेगा। सैकड़ों हाथों को रोजगार मिलेंगे। सरकार का खजाना भी बूम करेगा। काली पहाड़ी का इतिहास 500 साल पुराना है। धर्म प्रेमी व बाबा अमित का कहना है कि अज्ञात वनवास के दौरान पांडव पुत्र काली पहाड़ी आए थे और यहां रह कर मां यमला काली की पूजा की थी। पहाड़ी इलाका पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होना जमालपुर और जिले के लिए किसी सौगात से कम नहीं है।

Edited By: Shivam Bajpai