भागलपुर [रजनीश]। सूबे के तीसरे बड़े जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के चिकित्सक प्लाज्मा थेरेपी का गुर पटना स्थित एम्स में सीखेंगे। पहले फेज में प्रशिक्षण के लिए मुख्य लैब के दो चिकित्सकों का चयन किया गया है। दोनों चिकित्सकों का नाम एम्स प्रशासन को भेज दिया गया है। थेरेपी का प्रशिक्षण कार्यक्रम दस दिनों तक चलेगा। इसके बाद भागलपुर में भी प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज होगा। दरअसल, अभी प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज सिर्फ पटना एम्स में ही हो रहा है। तीन दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से भागलपुर के जेएलएनएमसीएच ब्लड बैंक को प्लाज्मा एफेरेसिस मशीन (कंपोनेंट सेपरेटर मशीन) उपलब्ध कराई गई है। मशीन को इंस्टाल भी कर दिया गया है।

पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश और डॉ. धनेश जानेंगे विधि

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हेमंत कुमार सिन्हा ने बताया कि एफेरेसिस मशीन आने के बाद पैथोलॉजी विभाग के दो पैथोलॉजिस्ट डॉ. मुकेश कुमार साह और डॉ. धनेश कुमार नाम भेजा गया है। प्राचार्य ने बताया कि इस थेरेपी से इलाज के लिए मेडिसीन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार के नेतृत्व में एक टीम भी बनाई गई है। इन सभी का खाका भी आइसीएमआर को दिल्ली भेजा जा रहा है।

डोनेट करने वालों की लगातार बढ़ रही संख्या

भागलपुर में बने कोविड सेंटर से स्वस्थ्य होकर जा रहे ज्यादातर मरीजों ने प्लाज्मा डोनेट करने की सहमति दी है। सभी ने एक कोरोना संक्रमितों के लिए अनूठी मिसाल पेश की है। एक सप्ताह के अंदर करीब 70 लोगों ने स्वेच्छा से प्लाज्मा डोनेट की बात कही है। सभी ने इसके लिए बकायदा अपना नाम करने की सहमति जताई है। डोनेट करने वालों का पता, ब्लड ग्रुप और मोबाइल नंबर भी रजिस्टर में अंकित किया गया है।

मुख्‍य बातें

-मेडिकल अस्पताल के दो चिकित्सकों का चयन, एम्स प्रशासन को भेजा गया नाम

-दस दिनों का होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम, फिर भागलपुर में शुरू होगी प्लाज्मा थेरेपी से इलाज

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