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भागलपुर JLNMCH फैब्रिकेटेड वार्ड में सिलेंडर अब पुरानी बात; पाइपलाइन से शुरू हुई शुद्ध ऑक्सीजन की निर्बाध सप्लाई

Published: Mon, 17 Aug 2026 11:51 PM (IST)

भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (JLNMCH) के फैब्रिकेटेड वार्ड में अब मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर नहीं ...और पढ़ें

मेडिसिन विभाग के HOD डॉ. राजकमल चौधरी की पहल पर अस्पताल अधीक्षक ने पाइपलाइन बिछाने के दिए थे सख्त निर्देश

मेडिसिन विभाग के HOD डॉ. राजकमल चौधरी की पहल पर अस्पताल अधीक्षक ने पाइपलाइन बिछाने के दिए थे सख्त निर्देश

HighLights

  1. फैब्रिकेटेड वार्ड में सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन शुरू।

  2. गंभीर मरीजों को अब मिलेगी निर्बाध ऑक्सीजन।

  3. सिलेंडर बदलने की परेशानी से मिली मुक्ति।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (JLNMCH), मायागंज के फैब्रिकेटेड वार्ड में भर्ती होने वाले गंभीर मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इस वार्ड में इलाजरत मरीजों को अब जीवनरक्षक ऑक्सीजन गैस के लिए सिलिंडर के भरोसे परेशान नहीं होना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन द्वारा फैब्रिकेटेड वार्ड को सीधे सेंट्रल ऑक्सीजन पाइपलाइन ग्रिड से जोड़ दिया गया है।

लगातार पांच दिनों तक चले तकनीकी कार्य और दबाव की सघन जांच (प्रेशर टेस्टिंग) के बाद विधिवत रूप से पाइपलाइन से अनवरत ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था के शुरू होने से न केवल मरीजों को समय पर ऑक्सीजन मिल सकेगी, बल्कि सिलिंडर बदलने के दौरान होने वाली आपाधापी से भी मुक्ति मिलेगी।

सिलिंडर पर निर्भरता से होती थी परेशानी, HOD ने लिखा था पत्र

उल्लेखनीय है कि फैब्रिकेटेड वार्ड में अब तक भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता पड़ने पर भारी-भरकम जंबो सिलिंडरों के माध्यम से आपूर्ति की जाती थी। सिलिंडर खाली होने की स्थिति में परिजनों को वार्ड ब्वॉय और कर्मियों के पीछे दौड़ना पड़ता था। इसके अलावा सिलिंडर बदलने की प्रक्रिया के दौरान कई बार ऑक्सीजन आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता था।

मरीजों की इस निरंतर समस्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष (HOD) डॉ. राजकमल चौधरी ने अस्पताल अधीक्षक को औपचारिक पत्र लिखकर फैब्रिकेटेड वार्ड को अविलंब मुख्य पाइपलाइन से जोड़ने का अनुरोध किया था। मामले की संवेदनशीलता और मरीजों के हित को देखते हुए अधीक्षक ने त्वरित संज्ञान लेते हुए तकनीकी टीम को काम पर लगाया।

5 दिन तक चला चेकिंग का काम, मानक के अनुरूप मिल रहा फ्लो

अस्पताल के बायोमेडिकल इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने फैब्रिकेटेड वार्ड में पांच दिनों तक लगातार काम कर पाइपलाइन का जाल बिछाया। प्रत्येक बेड के पास ऑक्सीजन आउटलेट और फ्लो मीटर स्थापित किए गए। इसके बाद लीकेज और फ्लो प्रेशर की बारीकी से जांच की गई।

जांच प्रक्रिया में सब कुछ संतोषजनक पाए जाने के उपरांत सेवा को नियमित रूप से चालू कर दिया गया। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि वार्ड के सभी बेडों पर मरीजों को मानक के अनुरूप और बेहतरीन फ्लो में ऑक्सीजन मिल रही है।

गंभीर और सांस के मरीजों को मिलेगा त्वरित उपचार

डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि फैब्रिकेटेड वार्ड में अक्सर मेडिसिन, सांस संबंधी रोगों (सीओपीडी, अस्थमा) और मौसमी बीमारियों से ग्रस्त गंभीर मरीज भर्ती होते हैं, जिन्हें 24 घंटे निर्बाध ऑक्सीजन की दरकार होती है।

अब सेंट्रल पाइपलाइन से सीधे कनेक्शन हो जाने के कारण ऑक्सीजन का दबाव एक समान बना रहेगा। सिलिंडर लाने, ले जाने और बदलने का झंझट हमेशा के लिए समाप्त हो गया है, जिससे नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को भी मरीजों के आपातकालीन इलाज में काफी सुगमता होगी।