संवाद सहयोगी, जमुई :  दिव्यांग सीमा अब भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम- एलिम्को (ALIMCO) के पांव से दौड़ेगी। ऐसा एलिम्को कानपुर द्वारा मुफ्त में पांव लगाने के फैसले लिए जाने के कारण संभव हो सकेगा। नतीजतन सीमा उच्च गुणवत्ता के कृत्रिम पांव के सहारे चल फिर सकेगी और फिर उसकी प्रतिभा को पंख लग जाने की उम्मीद जग जाएगी। इसकी जानकारी जिला पदाधिकारी ने सीमा और उसके माता-पिता को बुलाकर अपने कार्यालय कक्ष में दी है। इस दौरान सीमा की पढ़ाई के प्रति लगनशीलता को देखते हुए जिला पदाधिकारी अवनीश कुमार सिंह ने अपनी ओर से टैब तथा जमुई के इतिहास और भूगोल के साथ संस्कृति को समेटे हुए मेरा जमुई नामक पुस्तक भेंट किया है।

इसके पहले एलिम्को की टीम ने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश पर सीमा के पैर की माप ले ली है। कृत्रिम पांव लगाने के लिए 28 जून को सीमा अपने माता-पिता के साथ कानपुर के लिए रवाना होगी। वहां उसे 10 दिनों तक कृत्रिम पांव के सहारे चलने फिरने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। कानपुर जाने और आने से लेकर सीमा तथा उसके माता-पिता के रहने और खाने का खर्च एलिम्को ही वहन करेगी। इधर जिला पदाधिकारी ने टैब और पुस्तक भेंट करते हुए सीमा के उज्जवल भविष्य की शुभकामना दी है।

साथ ही उन्होंने कहा कि एलिम्को द्वारा जल्द ही जिला प्रशासन के सहयोग से दिव्यांगों की पहचान के लिए एक शिविर का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान कृत्रिम अंग तथा सहायक उपकरण के जरूरतमंद दिव्यांगों की पहचान की जाएगी। तदुपरांत आवश्यकतानुसार उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि एलिम्को की इच्छा कृत्रिम पांव पर सीमा के चलने फिरने लगने के बाद ही जमुई में शिविर लगाने की है। इसके पीछे अन्य दिव्यांग बच्चों को सीमा से प्रेरणा लेने की सीख देने की समझदारी है।

इस दौरान सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी आर के दीपक और खैरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी राघवेंद्र त्रिपाठी के अलावा सीमा की मां बेबी देवी तथा पिता खीरन मांझी सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। गौरतलब हो कि खैरा प्रखंड अंतर्गत फतेहपुर गांव की सीमा एक पांव से विद्यालय जाने की कठिन चेष्टा के क्रम में वायरल हुई थी। इसके बाद से उसकी मदद के लिए अनेकों हाथ उठने लगे। इसी क्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने भी वायरल वीडियो पर संज्ञान लेकर एलिम्को को आवश्यक दिशा निर्देश दिया था।

Edited By: Shivam Bajpai