भागलपुर। लाख प्रशासनिक दावों के बाद भी विक्रमशिला सेतु पर जाम की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सेतु व जिलों के अन्य हिस्सों में ट्रैफिक प्लान फाइलों में सिमटकर रह गया है। सारी व्यवस्था पुलिस के भरोसे छोड़ दी गई है। यदि सेतु पर कोई भारी वाहन खराब हो जाए तो क्रेन की व्यवस्था करने में घंटों लग जाते हैं। जिस वजह से कई किलोमीटर तक लंबा जाम लग जाता है। इतने प्रयासों और मांग के बाद भी अब तक खराब वाहनों को तत्काल सेतु से हटाने के लिए स्थायी क्रेन तक नहीं मिल पाया है। यह जाम की बड़ी वजह है। सीसीटीवी का भी मामला ठंडे बस्ते में

पुल पर जाम की निगरानी के लिए पोल पर सीसीटीवी कैमरा लगाने का प्रस्ताव था। यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया। पुलिस ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से कुछ कैमरे इंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर लगाए, लेकिन उसमें से भी कई खराब हो चुके हैं। सीमित संसाधनों में जाम से निपटना एक चुनौती है। सीमा विवाद के कारण फंस जाता है मामला

विक्रमशिला सेतु नवगछिया और भागलपुर के क्षेत्र में आता है। कई बार जाम लगने की स्थिति में फलां थाना क्षेत्र का मामला बता पुलिस मूकदर्शक बन जाती है। जब तक संबंधित थानों की या ट्रैफिक पुलिस मौके पर ना पहुंचे तब तक तैनात पुलिस आगे नहीं बढ़ती। अक्सर सीमा विवाद के कारण ही बड़ी दुर्घटनाओं में केस करने में काफी दिक्कतें आती हैं। कार्रवाई के नाम पर खानापूरी

पुल पर धड़ल्ले से ओवरलोड और नियम की अनदेखी करते हुए वाहनों का परिचालन होता है। इनके खिलाफ कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। कोटा पूरा करने के उद्देश्य से हर दिन एक या दो वाहनों से जुर्माना वसूल लिया जाता है, ताकि अधिकारियों को दिखा सकें की फील्ड में निकले थे। वॉकी-टॉकी ही बनेगा समन्वय का सहारा

दो दिन पूर्व डीआइजी सुजीत कुमार के निर्देश पर विक्रमशिला सेतु पर तैनात जवानों को वॉकी-टॉकी से लैस किया गया है। इससे वे लोग आसानी से जाम हटाने के लिए आपस में समन्वय कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें वॉकी-टॉकी ऑपरेट करने की ट्रेनिंग भी ट्रैफिक डीएसपी रत्न किशोर झा ने दी है।

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कोट :

सेतु पर जाम की समस्या से निजात के लिए जवानों को वॉकी-टॉकी दिया गया है। भारी वाहनों के खराब होने पर उसे हटाने के लिए स्थायी क्रेन का भी प्रस्ताव दिया गया है। जाम की समीक्षा कर इससे निजात पाने के और प्रभावी उपाय किए जाएंगे।

- आशीष भारती, एसएसपी भागलपुर

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