सुपौल (भरत कुमार झा) । जून का महीना जब ताल-तलैया पूरी तरह सूख गये होते हैं,सूर्यदेव की तपिश में वसुंधरा भी साथ निभा रही होती है, वैसे समय में मानसून के दस्तक मात्र से कोसी ने अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी है। सूखती धाराओं ने कलरव करना शुरू कर दिया है। विगत वर्षों की तरह तटबंध से सटी बहती एक धारा ने व्यवस्था को आंख दिखानी शुरू कर दी है। पूर्वी कोसी तटबंध के 0 किमी से गाईड बांध तक कोसी की धारा तटबंध के सटे समानांतर बह रही है। तटबंध के 22वें किमी से 27 वें किमी तक धारा तटबंध के बिल्कुल करीब है। ये सामानांतर धाराएं तटबंध से महज 10 मीटर से 150 मीटर तक की दूरी में बह रही है।

ऐसा नहीं कि इसबार ही ये तटबंध के करीब आई है। धारा बदलने को बदनाम कोसी 14 वर्ष पूर्व से ही पूरब की ओर आ चुकी है। इसी का नतीजा था कि 2008 में कोसी ने कुसहा में तटबंध को तोड़ दिया था और उन्मुक्त हो निकल पड़ी थी। कोसी ने बर्बादी की जो दास्तां लिखी उसे सोच आज भी दिल दहल उठता है।

हालांकि विभाग सहित प्रशासनिक महकमा पूरी तरह एलर्ट दिख रहा है। मुख्यमंत्री ने खुद क्षेत्र का दौरा किया है। विभागीय मंत्री ने तटबंध के कई विन्दुओं का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते समय से कार्य पूरा कर लेने की हिदायत दी है। हालांकि अभियंता तटबंध को पूरी तरह दुरुस्त बता रहे हैं।

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स्परों की होती रही अनदेखी

2008 में कुसहा में सीमा तोड़ पूरब रूख हुई कोसी को भले ही दक्षिण की ओर घुमाने में सफलता पा ली गई लेकिन अपनी प्रकृति के अनुरूप वह आज भी कई किमी तक पूर्वी तटबंध से सटे ही बह रही है। पिछले वर्ष भी 50 स्परों के नोज को छूती बह रही थी कोसी। सरायगढ़ के समीप हाइवे के काफी करीब है कोसी। इन जगहों पर स्परों की स्थिति है कि इसकी लंबाई व चौड़ाई दिनानुदिन घटती जा रही है, दूसरा कि इतनी दुर्दशा है इसकी कि कोसी की धारा को इसकी परवाह नहीं होती और वह तटबंध के करीब आ जाती है। हालांकि इसबार 31 स्परों पर कार्य शुरु किया गया है।

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हमेशा बचाव में ही लगा होता पूरा सिस्टम

विडंबना कहिये कि कोसी जैसी आक्रामक नदी से हमेशा बचाव की मुद्रा में ही दिखता है विभाग। जब कोसी की धारा बांध के करीब आने लगती है तो परक्यूपाइन के माध्यम से उसे मोड़ने का प्रयास किया जाता है। तटबंधों पर सुरक्षात्मक उपाय किये जाते हैं। लेकिन कोसी की धारा ही मध्य से बहे इसके लिये कभी सार्थक प्रयास नहीं किया जा सका है। तटबंधों की सुरक्षा का ख्याल भी ऐन वक्त ही आया करता है।

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15 जून से बराज से अधिकतम डिस्चार्ज

15 जून- 80,965 क्यूसेक

16 जून- 93,050 क्यूसेक

17 जून-1,10,155 क्यूसेक

18 जून- 1,02,605 क्यूसेक

19 जून- 81,165 क्यूसेक सुबह आठ बजे।

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बाढ़ अवधि शुरु होते ही डीएम ने लिया तैयारी का जायजा

15 जून को बाढ़ की अवधि शुरु हो जाती है इसी के मद्?देनजर 16 जून को जिलाधिकारी बैद्यनाथ यादव ने एसपी एवं मुख्य अभियंता के साथ सेंट्रल चैनल में किए जा रहे ड्रे¨जग कार्य का निरीक्षण किया। मुख्य अभियंता ने जानकारी दी कि पायलट चैनल बनाने का उद्?देश्य दोनों तटबंधों के बीचोबीलच कोसी नदी के पानी के बहाव को रखना है ताकि तटबंध पर कोई दबाव नहीं पड़े। डीएम ने नदी के पश्चिमी भाग में जियो बैग से बनाए जाने वाले विभिन्न स्टड का भी निरीक्षण किया। बराज के कुल 56 गेटों के आपरे¨टग सिस्टम का भी निरीक्षण डीएम द्वारा किया गया।

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चार योजनाओं में सरकार ने दिए 880 करोड़

बाढ़ प्रबंधन, बिहार कोसी बेसीन विकास परियोजना, बिहार कोसी बाढ़ समुत्थान योजना एवं राज्य योजना अंतर्गत ¨सचाई संव‌र्द्धन के तहत विगत 23 मई को चार अदद योजनाओं का शिलान्यास मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। इन योजनाओं की कुल लागत राशि 879.75 करोड़ रुपये है।

-पूर्वी एवं पश्चिमी कोसी तटबंध का उंचीकरण, सु²ढ़ीकरण, पक्कीकरण एवं संरचनाओं का निर्माण/पुर्नस्थापन कार्य-578.42 करोड़।

-पूर्वी कोसी तटबंध के किमी 15.50 एवं किमी 28.20 के बीच 14 अदद स्परों का सुरक्षात्मक एवं पुनस्र्थापन कार्य-106.92 करोड़।

-पूर्वी कोसी तटबंध के किमी 78.00 एवं किमी 84.00 के बीच 17 अदद स्परों का सुरक्षात्मक एवं पुनस्र्थापन कार्य-120.47 करोड़।

-पूर्वी कोसी मुख्य नहर के बिन्दु दूरी 60.20 दायां से नि:सृत रानीपट्टी वितरणी नहर के संचालन, निरीक्षण एवं सिचांई सुविधा मुहैया कराने हेतु सेवा पथ का पक्कीकरण कार्य-73.94 करोड़।

Posted By: Jagran

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