भागलपुर [दिलीप कुमार शुक्ला]। सावन माह शिव को अत्यंत प्रिय है। शिव की पूजा का महत्व सावन में अत्यधिक बढ़ जाती है। सावन में शिव की पूजा करने से वे अपने भक्तों पर अत्यधिक और तुरंत प्रसन्न होते हैं। खासकर सावन माह के सोमवार को तो भगवान शिव का साक्षात आशीर्वाद भक्तों पर रहता है। और सावन की सोमवारी का कहना ही क्या। इस दिन तो भगवान भक्तों को अशीर्वाद बांटते हैं और भक्तों द्वारा शिवलिंग की पूजा से वे तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। इससे भी खास बात अगर सावन माह के सोमवार को नागपंचमी हो जाए तो अद्भुत व दुर्लभ संयोग। सावन माह की सोमवारी और नागपंचमी एक दिन होना यह सुखद संयोग कभी—कभी होता है। जैसा कि इस बार हो रहा है। आइए... हम यहां बता रहें हैं इस​ दिन आप क्या करें। इस संबंध में कुछ पंडितों की क्या राय है।

20 वर्ष बाद बना ऐसा संयोग 
सावन, सावन तीसरी सोमवारी और नागपंचमी इस बार एक ही दिन होगा। यह शुभ संयोग है। इस बार यह दुर्लभ संयोग 20 वर्ष बाद आ रहा है। अभी सावन माह चल रहा है। सावन की तीसरी सोमवारी पांच अगस्त 2019 को है। उसी दिन शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि भी है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को नागपंचमी मनाया जाता है। यह तिथि सोमवार को है। इस कारण सावन, सावन की सोमवारी और नागपंचमी एक ही दिन सोमवार को पड़ता है।

सावन शिव के लिए शुभ है। और सावन माह में सोमवार दिन शिव के लिए विशेष शुभ है। सोमवार को सावन माह की शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि अर्थात नागपंचमी भी है। सर्प भी शिव को अत्‍यधिक प्रिय हैं। सावन, शिव, सोमवार, सर्प, नागपंचमी, शुक्ल पक्ष, पांचवीं तिथि यह सब एक ही दिन। अद्भुत और दुर्लभ संयोग।

इन तीनों का एक साथ पड़ना आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह सुखद और दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। ऐसा संयोग 20 वर्ष बाद प्राप्त हो रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इस वर्ष सावन के महीने में भोले बाबा की भक्तों पर असीम कृपा है। शास्त्र के अनुसार यह दुर्लभ संयोग हर मनोकामना पूर्ण कराएगा। बस श्रद्धालु इस दिन को आध्यत्मिक दिन बना ले।

हरेक मनोरथ पूरा करेगा वाला है यह अद्भुत तिथि

श्यामाचरण वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी के साहित्य आचार्य पंडित अमरेश कुमार तिवारी ने कहा कि सावन, सोमवार की सोमवारी और नागपंचमी एक ही दिन होने का दुर्लभ संयोग इससे पहले 16 अगस्त 1999 से हुआ था। इसी तरह का संयोग इस बार पांच अगस्त 2019 को होगा। इसके बाद यह संयोग 21 अगस्त 2023 को होने वाला है। सावन की सोमवारी और नागपंचमी एक ही तिथि को होने से इस दिन शिव की विशेष कृपा भक्तों पर रहेगी। शिव के गले में सर्प आभूषण के रूप में शोभा बढ़ाती है। लोग सर्प की भी पूजा करते हैं। शिव को सर्प काफी प्रिय है। साथ ही शिव के लिए सोमवार का दिन खास है। सोमवार को शिव की पूजा करने से भक्तों को मनोवांक्षित फल मिलता है। सावन तो शिव के विशेष प्रिय माह है। सावन की सोमावरी को नागपंचमी होना इस दिन को और खास बना देता है। नागपंचमी सावन के शुक्ल पक्ष की पांचवीं तिथि को मनाया जाता है। भक्तों के लिए पांच अगस्त का दिन खास है। शिव को प्रसन्न कर भक्त मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन सर्प की पूजा करने से शिव विशेष प्रसन्न्न होंगे। इस दिन सर्प देवता को दूध और धान का लावा खिलाया जाता है। लोग भी इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नाग कभी सोता नहीं है। त्रेता युग में राम जब वनवास गए थे तो शेषनाग अवतार लक्ष्मण जी उनकी सेवा में हर पल लगे रहते थे।

पंडित अमरेश कुमार तिवारी ने कहा कि इस दिन शिव का रूद्राभिषेक करना और नाग की पूजा करना लाभकारी होगा। शिव परिवार की पूजन में नाग का भी पूजा किया जाता है। ऐसा शुभ संयोग इस दिन और भी खास बना देता है। इस दिन जिनके कुंडली में काल सर्प दोष है वे दूध से भगवान शिव का रूद्राभिषेक करें और राहू का जाप करें। लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए इस दिन गन्ने के रस से शिव का रूद्राभिषेक करें। कुसोदक अर्थात कुस को गंगा जल में डालकर उस जल से शिव का रुद्राभिषेक करने से कठिन रोगों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि यह दिन काफी खास है। इस अद्भुत तिथि को शिव और नाग की आराधना कर मनोवांक्षित फल प्राप्त किया जा सकता है। शिव के साथ माता पार्वती और गणेश की भी पूजा करें। शिव परिवार के अन्य सदस्यों के पूजन से भी शिव प्रसन्न होते हैं। शिव परिवार में नंदी, भगवान कार्तिक आदि भी आते हैं।

नाग पंचमी का विशेष महत्व


गोवरांय निवासी पौराणिक कथा व्‍यास आनन्‍दमुर्ति आलोक जी महाराज ने कहा कि सावन महीने में सोमवार व्रत, शिवरात्रि और रक्षाबंधन के अलावा नाग पंचमी का भी विशेष त्योहार आता है। सर्पों का भगवान शिव से सीधा नाता है और वे शिव के आभूषण के तौर पर देखे जाते हैं, इसलिए इस मास में नाग पंचमी की पूजा का भी बहुत महत्व है। इस बार सोमवार पड़ने पर विशेष प्रकार से साधकगण पूजन यजन करेंगे। 'सोम सिद्धि सदा भवेत' इस प्रकार का योग समस्त कामना प्रदान करता है। 

इस मंत्र का जाप करते हुए शिव की पूजा करें, भय से मुक्ति मिलेगी।
वासुकिः तक्षकश्चैव कालियो मणिभद्रकः।
ऐरावतो धृतराष्ट्रः कार्कोटकधनंजयौ ॥
एतेऽभयं प्रयच्छन्ति प्राणिनां प्राणजीविनाम् ॥ (भविष्योत्तरपुराण – ३२-२-७)

आनन्दमुर्ति आलोक जी महाराज ने कहा कि पूरे श्रावण माह विशेष कर नागपंचमी को धरती खोदना निषिद्ध है। इस दिन व्रत करके सांपों को खीर खिलाई और दूध पिलाया जाता है। नागदेव की सुगंधित पुष्प और चंदन से पूजा करनी चाहिए क्योंकि नागदेव को सुगंध प्रिय है। "ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा" का जाप करने से सर्पविष दूर होता है। 11 अगस्त 2019 (रविवार) को सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी है। 12 अगस्त को सावन की चौथी अर्थात अंतिम सोमवारी है। उन्होंने आगे कहा कि सावन पूर्णिमा को रक्षा बंधन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के प्यार, स्नेह, सम्मान और श्रद्धा पर आधारित है। इस बार सावन पूर्णिमा 15 अगस्त को है। स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त 2019 (गुरुवार) को रक्षा बंधन मनाया जाएगा। 

काल सर्प योग से मिलेगी मुक्ति

सबौर निवासी पंडित चंद्रशेखर झा का कहना है कि जिन लोगों के कुंडली में काल सर्प योग बना हुआ है। उन्हें इस दिन शिवलिंग के उपर चांदी या तांबे से बने नाग-नागिन के जोड़े को रख कर महादेव का जलाभिषेक करना चाहिए। अगर परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु सर्प दंश से हुई है। तो उन्हें भी उक्त तिथि पर शिव के साथ नाग देवता की पूजा करना भी लाभप्रद होगा। नाग देवता की पूजा करने से पूर्वजों को सर्प योग से मुक्ति मिल जाएगी। 

भगवान शिव को प्रिय है सावन मास


पंडित आलोक कुमार ने कहा कि सावन मास को भगवान शिव का प्रिय मास माना जाता है। यही कारण है कि इस महीने में महादेव की पूजा विशेष महत्व है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धालु अपनी शक्ति के अनुसार व्रत, उपवास, पूजन, और अभिषेक आदि करते हैं। भगवान शिव को सावन का महीना इतना प्रिय क्यों है, इसको लेकर पौराणिक कथा प्रचलित है। सनत कुमारों ने भगवान शिव से सावन के प्रिय होने का कारण पूछा, तो भगवान शिव ने इसका उत्तर दिया- कि देवी सती ने महादेव को प्रत्येक जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने पिता राजा दक्ष के घर में योगशक्ति द्वारा देह त्याग के बाद देवी सती ने राजा हिमाचल और रानी मैना के घर पार्वती के रूप में दूसरा जन्म लिया। पार्वती के रूप में देवी ने सावन में निराहार रह कर कठोर व्रत की थी। मां पार्वती के इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी पार्वती से विवाह किया। तभी से भगवान महादेव को सावन का महीना प्रिय है।

शिव को समर्पित है यह माह

बता दें कि यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। क्योंकि भगवान विष्णु के सो जाने के बाद रुद्र रूप में भगवान शिव ही सृष्टि का संचालन करते हैं। धर्म ग्रंथों में सावन के महीने को बहुत ही उत्तम और पुण्य मास कहा गया है। इसमें सावन के सोमवार का महत्व सबसे अधिक है। सावन मास में शिव शिवलिंग में साक्षात निवास करते हैं। इस बार सावन के पहले सोमवार के दिन भी कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि थी। उसे भी भविष्य पुराण में नागपंचमी तिथि कहा गया है।

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Posted By: Dilip Shukla

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