भागलपुर [ललन तिवारी]। सब्जियों में मौजूद हानिकारक रसायन हमारे शरीर को नुकसान नहीं पहुंचा सकेंगे। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर इस पर शोध कर रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसी तकनीक को जन्म देना है, जिससे घरेलू स्तर पर ही सब्जियों में मौजूद कीटनाशकों को खत्म किया जा सकेगा।

इसके लिए कृषि वैज्ञानिक विभिन्न सब्जियों के नमूने इकट्ठा करेंगे। मशीन के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि किसी सब्जी में हानिकारक रसायनों की मात्रा कितनी है। इसी आधार पर उसे खत्म भी किया जाएगा।

दरअसल, फसलों को कीट-पतंगों से बचाने के लिए किसान खेतों में जहरीले रसायनों का प्रयोग करते हैं। फसल तैयार होने के बाद भी इनका प्रभाव बना रहता है। खाने के साथ ये जहर हमारे शरीर में भी चले जाते हैं, जो घातक बीमारियों को जन्म देते हैं। इस जहर के प्रकार और मात्रा जानने के लिए बीएयू विदेश से दो हाईटेक मशीनें मंगा रहा है।

परियोजना से जुड़ी युवा वैज्ञानिक प्रीतम गांगुली ने कहा कि राज्य के बाजारों में मिलने वाले सब्जियों के नमूने को इन हाईटेक मशीनों में डाला जाएगा। इससे यह पता लग जाएगा कि सब्जी में कितना जहर है। साथ ही मानव जीवन पर इसका क्या असर पड़ेगा। इसके बाद इन आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया जाएगा। बीएयू के पीआरओ डॉ. आरके सोहाने ने बताया कि हानिकारक रसायनों का पता चलने पर किसानों के बीच जागरुकता कार्यक्रम भी चलाया जाएगा। लोगों को पौष्टिक सब्जी मिले इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं। तीन साल के भीतर इसका रिजल्ट मिलने लगेगा।

हो सकता है कैंसर : सब्जियों में आर्गेनोक्लोरीन, आर्गेनोफॉस्फेरस और कार्बामेट जैसे कीटनाशक रसायन पाए जाते हैं। शरीर में इसके जाने से किडनी और लीवर की बीमारी की आशंका बनी रहती है। कैंसर भी हो सकता है।

डॉ. अजय कुमार सिंह (कुलपति बीएयू सबौर) ने कहा कि सब्जी उत्पादन में बिहार अग्रणी राज्यों में हैं। आने वाले समय में बिहार की सब्जी जहर मुक्त, गुणवत्तायुक्त और स्वास्थ्यवर्धक होगी। विश्वविद्यालय इसके लिए प्रयास कर रहा है।

Posted By: Dilip Shukla

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस