भागलपुर [संजय]। खुद जागो और जगाते रहो..। यह सुनने में कुछ अजीब लगेगा। यदि आपकी आंख झपकी तो चोर सारा सामान समेट ले जाएंगे। जागना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि चोरों ने सीनियर आइपीएस के घर ही धावा बोल कर कुछ सामान समेट लिया। चोरों की हिम्मत देखिए, जिनके कंधे पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं का माल का गायब कर दिया।

सवाल उठता है अब किसके भरोसे झपकी मारेंगे। जागना अब मजबूरी है, हालांकि यह पहला मामला नहीं है। इसी इलाके में चोरों ने एक आइएएस के घर पर भी धावा बोल दिया था। उनका सामान भी समेट कर ले गए थे। अभी तक जाबांज उनका कुछ भी सामान बरामद नहीं कर पाएं। इसलिए अपने घर की रखवाली खुद करनी पड़ेगी। सहयोग के लिए पड़ोसी को भी जगाते रहे। क्योंकि आपकी मदद खाकी नहीं कर पाएंगी। यदि मदद मांगने गए तो थाने में ऐसा व्यवहार होगा जैसे आपने खुद अपने घर चोरी करा ली हो।

जोर का झटका धीरे से

गांव जवार के चुनाव में हर कोई जीत रहा है। जीतने की वजह भी है, पांच साल तिजोरी जो खोले रहे। घर-घर घूमकर कुशलक्षेम पूछते रहे। देह में दर्द हो बावजूद चेहरे पर मुस्कान लाकर हाथ जोड़ते रहे। जनता जनार्दन सब समझती है, सेवा भी कराई और वोट भी नहीं दिया। 90 फीसद मुखियाजी जीत का सेहरा नहीं बांध पाएं। मुखिया जी के भविष्य की सारी योजनाओं पर पानी फिर गया। तिजोरी खाली हुई सो अलग।

रिजल्ट के दिन मुखिया जी के चेहरे से हंसी गायब थी, बस इतना कहते फिर रहे थे अब भरोसा नहीं करना किसी पर। इतना करने के बाद भी लोग धोखा दे गए। पांच साल तक मुर्गा-चावल की पार्टी भी लेते रहे। कोई कमी नहीं की। फिर भी विरोधी की गोद में जाकर बैठ गए। जनता ने पांच साल सभी को जितने का आशीर्वाद दिया। जब वोट दिया तब मुखिया जी को लगा जोर का झटका धीरे से।

Edited By: Dilip Kumar Shukla