भागलपुर [जेएनएन]। जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र से भागलपुर आए क्षेत्रीय प्रभारी और वैज्ञानिक वीरेंद्र सिंह ने कहा कि देश के लोगों को जम्मू कश्मीर का इतिहास बताने की जरूरत है। उन नायकों की तलाश करनी होगी, जो कश्मीर के थे, जिन्होंने अखंड भारत के निर्माण में अपना योगदान दिया। यहां का इतिहास पांच हजार वर्ष पुराना है। वीरेंद्र गांधी विचार विभाग में आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे।

उन्होंने प्राध्यापकों और छात्रों से कश्मीर विषय पर शोध को बढ़ावा देने की अपील की। कश्मीर को लेकर जो भ्रांतियां हैं, उसे दूर किए जाने की जरूरत है। अभी भी अनुच्छेद 370 को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि इस दिशा में सरकार ने सभी कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर अध्ययन केंद्र पिछले नौ वर्षों से कश्मीर विषय पर आंकड़े जुटा रहा है। यह प्राचीन सिल्क रूट रहा है, जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने अपना बलिदान भी दिया। राजा हरि सिंह भारत की स्वतंत्रता के समर्थक थे। 1930 के दशक में हुए सम्मेलन में ब्रिटिश भारत की सरकार ने उन्हें देसी रियासतों के प्रतिनिधि के तौर पर बुलाया था। अंग्रेजों को लगता था कि राजा हरि सिंह उनके पक्ष में बात रखेंगे, लेकिन हुआ इसके विपरीत। राजा ने भारत की स्वतंत्रता का खुलकर समर्थन किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रीता झा ने की। संचालन सहायक प्राध्यापक उमेश कुमार नीरज ने किया। संगोष्ठी में प्रो. गिरीश चंद्र पांडे, अमित रंजन सिंह, गौतम कुमार, मनोज कुमार दास, रोशन सिंह, सनोज कुमार, नरेन कुमार, जय कृष्ण कुमार, भवेश राजहंस, पंकज कुमार सिंह, शिल्पी कुमारी, गौरव कुमार, राजीव कुमार, चंदन कुमार कर्ण, संजय चौधरी, नकुल मंडल उपस्थित थे।

Posted By: Dilip Shukla

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