जागरण संवाददाता, भागलपुर। हिंदी हमारी मूल भाषा है। राजभाषा हिंदी हमारा अभिमान है। हिंदी को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। हमें महीने और हफ्तों नाम अंग्रेजी में हिंदी में लेना चाहिए। हिंदी के हस्ताक्षर से हमें इसके उत्थान की शुरू करनी चाहिए। नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं पर विशेष जोर दिया गया है। यह बातें तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने पीजी हिंदी में आयोजित राजभाषा सप्ताह के समापन पर कही।

इसके पूर्व कुलपति समेत विभागाध्यक्ष डा. योगेंद्र, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रो. कृष्ण कुमार हिंदी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। प्रो. हिंदी ने कहा कि हिंदी भाषा में एकरूपता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश से अंग्रेज तो चले गए, लेकिन उनकी अंग्रेजियत आज भी रह गई है। इस अवसर में डा. तुषारकांत द्वारा लिखित पुस्तक 'साहित्यसेवी तारकेश्वर प्रसाद : एक अनकही कथा' का लोकार्पण अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया।

अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष डा. योगेंद्र ने किया। उन्होंने राजभाषा सप्ताह के बारे में जानकारी दी। मंच संचालन डा. बहादुर मिश्र कर रह थे। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस अब बस औपचारिकता रह गई है। जब तक हम इसे दिनचर्या में नहीं लाएंगे तब तक इसके उत्थान की बात नहीं कर सकते। मौके पर राजभाषा सप्ताह के सफल प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दिव्यानंद, डा. सुजाता कुमारी, टीएमबीयू पीआरओ डा. दीपक कुमार दिनकर, नग्‍मा न‍िजा, खुशबू कुमारी के अलावा काफी संख्या में हिंदी और पत्रकारिता के विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद थे।

शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती मनाई

साहित्यकार शरतचुद्र चट्टोपाध्याय की 145वीं जयंती मनाई गई।  क्रिस्टीर मिलन मेला और बिहार बंगाली संमिति एवं चंपानगर शाखा के संयुक्त तत्वावधान में कई स्थानों पर शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। मानिक सरकार स्थित गांगुली बाड़ी में लोगों द्वारा शछ्धाजलि दी गई। इनमें डा. मृत्युंजय कुमार चौधरी, राजीवकांत मिश्रा, डा. शांतनु सेन, डा. आनंद मिश्रा, श्वेता सुमन, जिया गसेश्वामी, अंजलि घोष, शांतनु गांगुली, देवाशीष पाल, तरुण घोष आदि एपस्थित थे। घंटाघर स्थित शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के शिलापट्ट पर 21 दीप जला का श्रद्धंजलि दी गई।

Edited By: Dilip Kumar Shukla