भागलपुर [जेएनएन]। सिल्क सिटी में हवाला का कारोबार भ्रष्टाचार के पैसों पर टिका है। इस धंधे में लगे लोगों के तार पूर्व में सृजन घोटाले से भी जुड़े रहे हैं। कागजी सुबूत न होने की वजह से न तो पुलिस इनके खिलाफ कार्रवाई कर पाती है न ही आयकर विभाग।

कुछ महीने पूर्व बांका में भी हवाला कारोबारियों की मोटी रकम स्कॉर्पियो में पकड़ी गई थी। तब इस रकम का कोई दावेदार सामने नहीं आया। बाद में भागलपुर के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह राशि लौटाई जा सकी। यह घटना कुछ दिनों तक शहर के व्यवसायियों के बीच सुर्खियों में रही।

हवाला कारोबारी गिरफ्त से बाहर

सृजन घोटाले में सीबीआइ ने बैंककर्मियों और सरकारी कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के आरोप में सलाखों के पीछे तो किया, लेकिन हवाला कारोबारी अब तक सीबीआइ की गिरफ्त से बचे हुए हैं।

रिश्वत का माल भी हवाला में

रिश्वतखोरों ने चढ़ावा लेने का अपना तरीका बदल लिया है। अधिकांश कार्यालयों में सीसीटीवी है, जिससे पकड़ में आने का भय बना रहता है। निगरानी विभाग की भी नजरें ऐसे अधिकारियों व कर्मियों पर रहती हैं। परिणामस्वरूप अब रिश्वत की लेनदेन कुछ व्यवसायियों के माध्यम से होने लगी है। अधिकारियों द्वारा इस बात का संकेत संबंधित व्यक्ति को दे दिया जाता है। काम होने के पूर्व मोटी रकम वहां पहुंच जाती है। हवाला कारोबारी इस राशि को अपने धंधे में लगाते हैं। धंधे से हुए मुनाफा और मोटी रकम के एवज में सूद का भुगतान संबंधित व्यक्ति को किया जाता है। इस तरह उनकी मोटी पूंजी बनी रहती है और सूद की राशि आती रहती है।

बस लूट के बाद खुल सकते हैं कई मामले

झारखंड के दुमका के मसानजोर में 27 अगस्त को कोलकाता जा रही बस में लूटपाट के बाद हवाला का मामला सामने आया है। दुमका के एसपी ने कहा है कि इसमें भागलपुर से हवाला का एक करोड़ रुपया आ रहा था। इसे पहुंचाने का ठेका चालक को दिया गया था। उसी ने लूटपाट कराई थी। पुलिस तफ्तीश में कई मामले खुल सकते हैं।

डीआइजी विकास वैभव ने कहा कि पुलिस के संज्ञान में मामला सामने आने पर उसकी जांच कराई जाएगी। जांच के बाद दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Dilip Shukla

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