हरतालिका तीज 2026 : चतुर्थी युक्त तृतीया में व्रत रखना बेहद फलदायी, शिव परिवार का मिलेगा अखंड आशीष
Hartalika Teej 2026 हरतालिका तीज 2026 पर तृतीया और चतुर्थी तिथि का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे व्रतियों के ...और पढ़ें

Hartalika Teej 2026 : चतुर्थी युक्त तृतीया के शुभ संयोग में हरतालिका तीज आज; निर्जला व्रत रखेंगी सुहागिनें, बाजार में खरीदारी की धूम
HighLights
हरतालिका तीज पर तृतीया-चतुर्थी का अत्यंत शुभ संयोग बना।
सुहागिनें पति की लंबी आयु हेतु निर्जला व्रत रखेंगी।
भागलपुर बाजारों में पूजन सामग्री, फलों के दाम बढ़े।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Hartalika Teej 2026 देवाधिदेव महादेव के मस्तक पर सुशोभित द्वितीया का बाल चंद्रमा, शक्ति स्वरूपा मां पार्वती और प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश— सोमवार को आस्था, त्याग और साधना के इन तीनों पावन स्वरूपों का अद्भुत आध्यात्मिक संगम देखने को मिलेगा। सुहाग के सबसे बड़े और कठिन पर्व 'हरतालिका तीज' पर इस बार तृतीया के साथ चतुर्थी तिथि का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है।
ज्योतिषविदों के अनुसार यह दुर्लभ ग्रह-गोचर व्रतियों के लिए अखंड सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि का विशेष वरदान लेकर आया है। पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में अटूट प्रेम की कामना लिए सुहागिन महिलाएं 24 घंटे का कठोर निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, मां गौरी और गणेश जी की आराधना में लीन रहेंगी।
हरतालिका तीज पर इस बार बना तृतीया के साथ चतुर्थी तिथि का अति दुर्लभ और फलदायी संयोग; उदया तिथि में रखा जा रहा व्रत
सुहागिन महिलाएं 24 घंटे तक निर्जला और निराहार रहकर करेंगी भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य श्रीगणेश की आराधना
रविवार को 'नहाय-खाय' की तर्ज पर गंगा स्नान कर महिलाओं ने ग्रहण किया सात्विक आहार; मंगलवार की सुबह होगा विधिवत पारण
भागलपुर के वेरायटी चौक और खलीफाबाग में उमड़ा जनसैलाब; फलों, पूजन सामग्री, बांस की डलिया और सुहाग के सामान के चढ़े भाव
ज्योतिषाचार्य पंडित सचिन कुमार दुबे ने बताया कि धर्मशास्त्रों और निर्णय सिंधु के अनुसार हरतालिका तीज के लिए 'द्वितीया युक्त तृतीया' को शास्त्र सम्मत नहीं माना गया है, जबकि 'चतुर्थी युक्त तृतीया' को सर्वथा श्रेष्ठ, फलदायी और सौभाग्यवर्धक बताया गया है। पंचांगीय गणना के अनुसार तृतीया तिथि मां गौरी की मानी जाती है और चतुर्थी तिथि रिद्धि-सिद्धि के दाता भगवान गणेश की है।
ऐसे में दोनों तिथियों का एक साथ आना पूरे शिव परिवार के संयुक्त पूजन का महासंयोग रचता है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि रविवार सुबह 7:16 बजे से शुरू होकर सोमवार सुबह 7:18 बजे तक (मिथिला पंचांग अनुसार 7:28 बजे तक) रहेगी। शास्त्रोक्त उदया तिथि की मान्यता के आधार पर सोमवार को ही हरतालिका तीज का मुख्य व्रत रखा जा रहा है। व्रती महिलाएं पूरे दिन-रात निर्जला रहकर मंगलवार की सुबह पूजा-अर्चना के बाद पारण करेंगी।
गंगा स्नान के बाद सात्विक आहार, कठिन साधना की तैयारी
कठिन साधना से पूर्व रविवार को महिलाओं ने नियम-निष्ठा के साथ व्रत की तैयारी की। सुबह पवित्र गंगा नदी में स्नान करने के बाद महिलाओं ने शुद्ध घी में बना सात्विक भोजन ग्रहण किया। दाल, भात, मौसमी हरी सब्जियां और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक साग का सेवन कर व्रतियों ने अगले 24 घंटे के निर्जला उपवास के लिए स्वयं को शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार किया। सोमवार की शाम महिलाएं सोलह श्रृंगार कर, हाथों में मेहंदी रचाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाओं की स्थापना करेंगी। बांस की डलिया में फल, पारंपरिक पकवान (ठेकुआ-पिरकिया) और सुहाग सामग्री सजाकर अखंड सौभाग्य की कथा सुनी जाएगी।
खलीफाबाग से वेरायटी चौक तक तिल धरने की जगह नहीं
पर्व की पूर्व संध्या पर रविवार को भागलपुर के बाजारों में आस्था और खरीदारी का जबर्दस्त उल्लास देखने को मिला। दोपहर ढलते ही खलीफाबाग चौक, वेरायटी चौक, स्टेशन रोड और मिरजानहाट के बाजारों में महिलाओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। भीड़ इतनी अधिक थी कि प्रमुख मार्गों पर पैदल चलना भी दूभर हो गया। वेरायटी चौक पर फुटपाथ से लेकर दुकानों तक महिलाएं हाथों में आकर्षक मेहंदी लगवाती नजर आईं। वहीं कॉस्मेटिक, चूड़ी और शृंगार की दुकानों पर सुहागिनों की लंबी कतारें लगी रहीं।
डलिया और फलों की मांग बढ़ते ही उछले दाम
तीज की खरीदारी को लेकर फल और पूजन सामग्री के बाजार में भारी उछाल दर्ज किया गया। मांग अधिक होने के कारण कई जरूरी वस्तुओं के दाम चढ़े रहे। खुदरा बाजार में केला 50 से 70 रुपये प्रति दर्जन, खीरा 30 रुपये पाव (लगभग 100 रुपये किलो), नाशपाती व सेब 100 रुपये किलो और अनार 160 से 180 रुपये किलो बिका। पूजन के लिए नारियल 80 रुपये जोड़ा, पूजन डलिया 80 से 100 रुपये जोड़ा और केतारी (ईख) 30 से 35 रुपये प्रति पीस की दर से बिकी। इसके अलावा ठेकुआ-पिरकिया के सांचे, मिट्टी के बर्तन, हरतालिका व्रत कथा की पुस्तकें, शिव-पार्वती के वस्त्र और माला की भी देर रात तक रिकॉर्ड बिक्री हुई।
