भागलपुर [जेएनएन]। चार जून से कार समेत लापता बताए जा रहे रामगढ़ के अधिवक्ता रोबा कॉलोनी रांची रोड निवासी मिथिलेश कुमार सिंह की गुमशुदगी मामले में गुरुवार को उस समय सनसनीखेज मोड़ आ गया, जब उन्हें बिहार के गया जिले के डोभी के पास उन्हें रामगढ़ के बिंझार निवासी हार्डकोर नक्सली रूपेश कुमार सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। इन दोनों के साथ अधिवक्ता का साथी नईसराय निवासी मो. कलाम भी गिरफ्तार किया गया है। मौके से ही कार में भारी मात्रा में जिलेटिन व नक्सली साहित्य भी बरामद हुआ है।

वहीं दबोचा गया हार्डकोर रूपेश कुमार सिंह भाकपा माओवादी के क्राइम ब्यूरो टेक्निकल की स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य है। पुलिस के अनुसार वह डुमरिया थाना क्षेत्र के छकरबंधा में नक्सलियों को विस्फोटक की आपूर्ति करने जा रहा था। छकरबंधा क्षेत्र में हाल ही में नक्सलियों ने पूर्व विधान पार्षद अनुज कुमार सिंह का मकान भी उड़ाया था। यह नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है।

शेरघाटी के डीएसपी रवीश कुमार ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हजारीबाग की ओर से नक्सली विस्फोटक लेकर छकरबंधा जा रहे हैं। वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर तत्काल एसटीएफ की टीम गठित कर डोभी मोड़ पर वाहन चेकिंग शुरू कर दी गई। इसी दौरान झारखंड के नंबरवाली एक सिल्वर कलर की स्विफ्ट डिजायर कार से पुलिस ने विस्फोटक के साथ तीनों को गिरफ्तार कर लिया।

नक्सली रूपेश ने पूछताछ में स्वीकार किया कि आसपास के कई राज्यों में नक्सलियों को विस्फोटक की आपूर्ति करता था। इससे पहले भी तीन खेप आपूर्ति कर चुका है। वह जिस टीम का सदस्य है, उसका काम विस्फोटकों की आपूर्ति करना है।

इससे पहले दो दिनों तक अधिवक्ता की तलाश में रामगढ़ पुलिस हलकान रही। अधिवक्ता मिथिलेश सिंह व रूपेश कुमार नईसराय निवासी नीरज वर्णवाल की कार किराये पर लेकर रामगढ़ से गया जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र चमराबंदा इलाके में जा रहे थे। अधिवक्ता की तलाश के लिए रामगढ़ पुलिस ने बिहार पुलिस से भी संपर्क किया था। इसी बीच पुलिस को परिजनों ने सूचना दी कि लापता अधिवक्ता व चालक ने अपने रिश्तेदारों व कार मालिक को मोबाइल से जानकारी दी है कि वे लोग बाराचट्टी, गया के आसपास फंसे हैं और सुरक्षित हैं। उन्होंने रात तक वापस लौट आने की भी बात कही। हालांकि रात तक अधिवक्ता व चालक का मोबाइल स्विच ऑफ मिला। इसी क्रम में तीनों गिरफ्तार कर लिए गए।

बरामद विस्फोटक व अन्य सामग्री

डीएसपी ने बताया कि कार से 15 बंडल डेटोनेटर बरामद किए गए हैं। प्रत्येक बंडल में 25 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर है। इसके अलावा 32 पीस जिलेटिन छड़, नक्सली साहित्य, तीन मोबाइल और एक चिप बरामद किया गया है। अनुमान है कि चिप से ही संदेशों का आदान-प्रदान होता था। उसे गिरफ्तार करने को बनाई गई टीम में एएसपी नक्सल अभियान अरूण कुमार, डीएसपी रवीश कुमार, सर्किल पुलिस इंस्पेक्टर जेपीयादव, डोभी थानाध्यक्ष अरूण कुमार सहित कोबरा और जिला पुलिस बल के जवान शामिल थे।

शोध गांधी विचार पर, काम दहशत फैलाने का

एसटीएफ टीम का नेतृत्व कर रहे एसपी नक्सल अभियान अरूण कुमार सिंह ने बताया कि जब्त कार भाड़े की है। पता लगाया जा रहा है कि कार किसकी और कहां की है। रूपेश ने अपने को झारखंड से प्रकाशित एक पत्रिका का कथित संपादक बताया। उसने कहा कि इसमें सरकार और सामंतवादी व्यवस्था के खिलाफ लेख छापे जाते हैं। उसने खुद को पोस्ट ग्रेजुएट बताया। वह तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर से 2012 में गांधी विचार पर शोध कर रहा था। उसने पुलिस को बताया कि विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान वह छात्रसंघ का प्रतिनिधित्व किया करता था। प्रेस कांफ्रेंस में चेहरा ढककर लाए जाने पर उसने उसे खुले में लाने का आग्रह किया, पर पुलिस ने कहा कि यह मैनुअल के खिलाफ है।

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Posted By: Dilip Shukla

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