[अशोक अनंत] भागलपुर। नशेबाजों को बुरी लत से छुटकारा दिलाने के लिए सदर अस्पताल में खोले गए नशा मुक्ति केंद्र में खुद सरकारी कर्मचारी ही पलीता लगाने पर तुले हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग और नशा मुक्ति केंद्र के लापरवाह रवैये के कारण सरकारी विभागों द्वारा एक भी शराबी को यहां भर्ती नहीं कराया जा सका है। स्थापना के दो साल बाद भी यहां मात्र 65 शराबियों का ही इलाज हो पाया है। इन्हें इनके परिजन यहां लेकर आए थे। जबकि विभिन्न विभागों द्वारा सौंपी गई सूची के मुताबिक जिले में 11536 शराबी हैं। अब भी अगर ध्यान नहीं दिया गया तो सरकार की मनसा पर पानी फिरते देर नहीं लगेगी। नशामुक्ति केंद्र में ताला भी लटक सकता है।

28 मार्च को हुआ उद्घाटन

नशा मुक्ति केंद्र का 28 मार्च 2016 को उद्घाटन किया गया था। तब से लेकर 4 अप्रैल 2018 तक कुल 65 आदतन शराबियों का ही इलाज किया गया है। नशा मुक्ति केंद्र में 20 बेड लगाए गए हैं। सभी कमरे वातानुकूलित हैं। मरीजों के मनोरंजन के लिए एलईडी के अलावा लूडो, ताश आदि की भी सुविधा उपलब्ध है। यहां उन्हें मुफ्त भोजन भी कराया जाता है। चिकित्सक, डेटा ऑपरेटर, काउंसिलर आदि की ड्यूटी 24 घंटे है।

अब शराबी नहीं आते

नशा मुक्ति केंद्र के नोड्ल पदाधिकारी डॉ. अशरफ रिजवी ने कहा कि आउटडोर में 208 लोगों की काउंसिलिंग की गई। इनमें 65 शराबियों को नशा मुक्ति केंद्र में रखकर इलाज किया गया। जबकि 24 शराबियों को जेएलएनएमसीएच रेफर कर दिया गया। अब शराबी नहीं आते। भांग, गांजा आदि सेवन करने वाले आ रहे हैं। जिनकी काउंसिलिंग की जा रही है। इन्हें नियमत: भर्ती नहीं किया जा सकता।

जागरूकता की कमी

स्वास्थ्य विभाग ने गत वर्ष जवारीपुर और जरलाही में जागरूकता अभियान चला नशेबाजों को नशा मुक्ति केंद्र आने को प्रेरित किया था। काउसिलिंग भी की गई थी। लेकिन एक भी व्यक्ति नहीं आया।

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