जागरण संवाददाता, भागलपुर : शहरी क्षेत्र में विकास कार्यों के बदले नगर निगम के सिर पर बदनामी का ताज सजा रहा है। निगम के चौथे बोर्ड का कार्यकाल नौ जून को पूरा होने वाला है, लेकिन शहरवासी को सिर्फ कोरा आश्वासन मिलता रहा। इस वर्ष चर्चा में घोटालों व विवादों में गुजर रहा है। इसमें शहर की विकास योजनाएं पीछे रह गई। ट्रेड लाइसेंस घोटाले से वर्ष शुरुआत हुई। इसके बाद मजदूरी घोटाला भी उजागर हुआ। जिसके बाद जांच टीम गठित होने व मामले को उच्च न्यायालय में ले जाने का सिलसिला जारी है। बात यहीं पर नहीं थमी, मेयर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद शुरू हुआ। नतीजा शहरी क्षेत्र में 178 योजनाएं पीछे रह गईं। अधिकांश कार्य धरातल पर नहीं उतरी। स्वच्छता रैंङ्क्षकग में खराब प्रदर्शन ने निगम की छवि ही धूमिल कर दी।

मजदूरी घोटाले पर पार्षद व निगम प्रशासन में विवाद

नगर निगम में मजदूरी घोटाले को लेकर पार्षदों ने जमकर बवाल किया। निगम में धरना-प्रदर्शन भी हुआ, लेकिन निगम प्रशासन ने चुप्पी साध ली। पार्षदों ने हाईकोर्ट में याचिका दर्ज करा दी है। वहीं जोगसर थाने, निगरानी के साथ जिला प्रशासन ने भी जांच शुरू कर दी है। इसके बाद निगम ने दो तत्कालीन जोनल प्रभारी को निलंबित कर दिया है। आठ सफाई कर्मियों के मामले में नगर निगम ने जांच कमेटी को रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया। जांच टीम ने दो बार लिखित और दो बार मौखिक रूप से नगर आयुक्त से जानकारी मांगी थी। टीम ने नगर निगम जाकर भी रिपोर्ट की मांग की थी। मेयर के पति जिला परिषद अध्यक्ष अनंत कुमार के पेट्रोल पंप कर्मी अनिल तांती ने बिना कार्य के निगम से भुगतान कराने का आरोप लगाया है। 2019 से अप्रैल 2021 तक कार्य कराने के मामले की जांच जारी है।

27 लाख का हुआ ट्रेड लाइसेंस घोटाला

नगर निगम में 2017 से फर्जी ट्रेड लाइसेंस जारी कर राशि गबन करने का खेल चल रहा था। वर्तमान शाखा प्रभारी निरंजन मिश्रा के द्वारा फर्जीवाड़ा पकड़ा। इसके बाद जनवरी से निगम ने आतंरिक जांच कमेटी गठन किया। लेकिन, जांच पूरी नहीं हुई। मामला प्रमंडलीय आयुक्त के पास पहुंचने पर जिलास्तरीय जांच हुई। निगम में खलबली मच गई। नगर निगम में ट्रेड लाइसेंस मामले में 27 लाख से अधिक का घोटाले का पर्दाफाश हुआ। जांच के दौरान पूर्व शाखा प्रभारी दिव्या स्मृति से राशि वसूली हो रही है।

स्वच्छता सर्वेक्षण में भी निगम फिसड्डी

शहर की स्वच्छता रैंकिंग हाशिए पर जाने पर भी निगम प्रशासन की कुंभकरणी नींद नहीं टूटी है। इससे सबक लेकर दमखम के साथ सफाई व्यवस्था में सुधार का प्रयास करना चाहिए, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। तरल अपशिष्ट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रयास कर पाने में विफल रही है, जबकि कचरा मुक्त शहर और खुले में शौच मुक्त स्थिति के आधार पर शहरों की स्वच्छता रैंकिंग हुई। इसमें स्वच्छता रैंकिंग में वर्ष 2020 में भागलपुर ने 379 रैंकिंग हासिल की थी, जबकि इस वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर भागलपुर जिले का स्थान 523 रहा। वहीं तीन से 10 लाख की आबादी वाले 372 शहरों में 366वीं रैंक हासिल की। अब नए सिरे से संसाधनों की खरीदारी की जा रही है। इसे धरातल पर उतारने की कोई ठोस कार्ययोजना नहीं होने से शहरवासी को परेशानी हो रही है।

निगम में दो योजनाओं का कार्य अधर में

नगर निगम कार्यालय परिसर में 93 लाख रुपये की लागत पिछले तीन वर्ष से सम्राट अशोक भवन का कार्य चल रहा है। भवन निर्माण के कार्य में संवेदक कुंडली मार बैठ गया है। उपमुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी निर्माण कार्य पिछले एक वर्ष से बंद है। वहीं निगम परिसर में ही पार्षद कक्ष बनकर तैयार है। संवेदक से हैंडओवर लेने में निगम प्रशासन अब तक नाकाम रही है।

जलापूर्ति योजना का नहीं मिला लाभ

शहरवासी को स्वच्छ पेयजल के लिए करीब पांच सौ करोड़ रुपये की जलापूर्ति पर कार्य चल रहा है। इससे नए वाटर वक्र्स का निर्माण, 19 जलमीनार व पौने पांच सौ किलोमीटर पाइप बिछाना है। वहीं हाउङ्क्षसग बोर्ड व ठाकुरबाड़ी में जलमीनार से जलापूर्ति के लिए बोरिंग करना था। बोरिंग का कार्य पूरा हुआ लेकिन हाउसिंग बोर्ड के जलजमीनार में असंख्य छिद्र हो गए है। जून से लोगों को जलापूर्ति का लक्ष्य भी फेल हो गया। वहीं 19 नए डीप बोरिंग में से 12 से ही जलापूर्ति हो सकी। हरेक वार्ड में एक-एक प्याऊ की योजना भी फेल हो गइ्र।

Edited By: Shivam Bajpai