भागलपुर। सूचना और जनसंपर्क विभाग, बिहार द्वारा जारी श्रावणी मेला 2018 में एक बार फिर बीते लगभग एक दशक से भी अधिक समय से ठहराव स्थल की जानकारी दी जा रही है। पुस्तिका में दर्ज ध्वजागली के निकट कन्या मध्य विद्यालय धरातल पर कहीं है ही नहीं। इसी तरह बाजार चौक से कृष्णगढ़ मार्ग पर सार्वजनिक धर्मशाला का कोई अस्तित्व ही नहीं है। बाजार चौक से स्टेशन रोड पर मारवाड़ी युवा मंच का कावरिया शिविर भी दो वषरें से लगना बंद हो गया है। रेलवे गोदाम का अस्तित्व दो दशक पूर्व ही समाप्त हो गया है। लेकिन उक्त सभी ठहराव स्थल इस पुस्तिका में दर्ज हैं। जबकि सीतारामपुर में आठ साल पूर्व बने सरकारी धर्मशाला का पुस्तिका में कभी उल्लेख ही नहीं होता है।

इसके अलावा कृष्णानंद उच्च विद्यालय को वषरें से कृष्ण नंदन उच्च विद्यालय, दरबारी सिंह मध्य विद्यालय को दरबारी चौधरी मध्य विद्यालय, सरदारी चौधरी उच्च विद्यालय को सरदार चौधरी उच्च विद्यालय और पार्वती देवी मुरारका बालिका उच्च विद्यालय को पार्वती उच्च विद्यालय लिखा जाना भी बीते एक दशक से भी अधिक समय से यथावत है।

इन सबसे अलग सच्चाई ये है कि किसी भी उच्च या मध्य विद्यालय में कावरियों के बैठने तक की जगह नहीं है। प्रतिवर्ष मेला में प्रतिनियोजन पर आने वाला पुलिस बल ही इन सभी स्कूलों में जैसे तैसे भेड़ बकरियों की तरह भरे रहते हैं। बावजूद इसके मेला क्षेत्र में 24 घटे जारी सूचना में भी उक्त सभी स्थलों को कावरियों के ठहराव स्थल के रूप में बताया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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