भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। कहते हैं सच छुपाने की लाख चेष्टा करें, वह किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाता है। घोघा पुलिस ने अशोक मंडल हत्याकांड में हत्यारे को बचाने के लिए सधी कूट रचना की। कत्ल के मुकदमे को तथ्य की भूल बता उसमें फाइनल रिपोर्ट लगा न्यायालय में दाखिल कर दिया। फाइनल रिपोर्ट दाखिल करने में पुलिस ने बड़ी होशियारी तो दिखा दी। बात बन भी गई थी लेकिन पुलिस की हस्त लिखित केस डायरी में कई ऐसे तथ्य साक्ष्य के तौर पर थे जो पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को चुनौती देने को काफी थे। प्रभारी मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रुंपा कुमारी ने जब केस डायरी का अवलोकन किया तो पुलिस की कारगुजारी सामने आ गई। पुलिस ने हत्या आरोपित अर्जुन यादव को बचाने की कूट रचना की थी उसका इस्तेमाल केस डायरी में नहीं हो पाया था। यानी तथ्य की भूल दिखा कत्ल के मुकदमे को फाइनल करने वाली पुलिस ने केस डायरी में ही तथ्य छोड़ दिए थे। यानी केस डायरी की कंडिका 3, 4, 7, 8 और 9 में गवाहों के बयान चीख-चीख कर आरोपित की भूमिका को उजागर कर रहे थे। गवाहों के बयान से यह प्रतीत हो रहा था कि वारदात के दिन अंतिम रूप से अशोक मंडल (मृतक) के साथ आरोपित देखा गया था।

अशोक का शव काली पोखर से बरामद हुआ था। प्रभारी सीजेएम ने अपने आदेश में कहा है कि केस डायरी में उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपित अर्जुन यादव के विरुद्ध भादवि की धारा 302, 201 का अपराध करने का प्रथम दृष्टया सामग्री मौजूद है। इसलिए उसके विरुद्ध हत्याकांड में संज्ञान लिया जाता है। यही नहीं न्यायालय ने उक्त मुकदमे में दौरा सुपुर्द करने का आदेश भी दे दिया। वरना घोघा पुलिस ने एसएसपी और डीएसपी के निर्देश पर कत्ल के मुकदमे को तथ्य की भूल बता फाइनल कर आरोपित को मदद पहुंचा ही दी थी।

13 सितंबर 2019 को हुई थी सन्हौला के अशोक मंडल की हत्या

सन्हौला थाना क्षेत्र के महादेवापुर गांव निवासी अशोक मंडल की हत्या 13 सितंबर 2019 को घोघा थाना क्षेत्र में हुई थी। उसकी पत्नी सुनीता देवी ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराते हुए उसके दोस्त अर्जुन यादव को आरोपित बनाया था। अर्जुन भी महादेवापुर का ही रहने वाला है। हत्याकांड के बाद उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था। पुलिस आरोपित को मदद पहुंचाने की फिराक में थी।

Posted By: Dilip Shukla

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