भागलपुर में सस्ता इलाज देख दंग रह गए जर्मनी के डॉक्टर, कहा- अपने देश में भी इसे लागू कराएंगे
जर्मनी के डॉ. जॉन वुल्फ भागलपुर में गंभीर हड्डी रोगों के कम लागत वाले उपचार से अत्यधिक प्रभावित हुए। वे ...और पढ़ें

डॉ. रहमान के साथ डॉक्टर जॉन। जागरण
HighLights
जर्मन डॉक्टर जॉन वुल्फ भागलपुर के इलाज से प्रभावित।
कम लागत में गंभीर हड्डी रोगों का सफल उपचार।
जर्मनी में भी इस उपचार पद्धति को लागू करने की योजना।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर में गंभीर हड्डी रोगों का इलाज और जटिल आपरेशन जर्मनी के मुकाबले बहुत कम खर्च में हो रहा है। यह देखकर जर्मनी के न्यूयार्क मस्कुलोस्केलेटल यूनिवर्सिटी सेंटर (एमयूएम), एलएमयू यूनिवर्सिटी हास्पिटल के ट्रामा सर्जरी एवं ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. जॉन वुल्फ प्रभावित हुए।
भागलपुर में कम लागत में इलाज की तकनीक सीखकर वे गुरुवार को जर्मनी लौट गए। न्यूयॉर्क मस्कुलोस्केलेटल सेंटर यूरोप के बड़े और आधुनिक चिकित्सा केंद्रों में शामिल है।
डॉ. जॉन को डॉ. इम्तियाजुर रहमान के काम और उपचार की जॉनकारी यू-ट्यूब के माध्यम से मिली थी। संपर्क के बाद वे 15 दिन पहले तातारपुर स्थित अस्पताल पहुंचे थे।
यहां मरीजों की संख्या और जटिल मामलों के उपचार को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। एक विशेष बोन स्क्रू की मदद से गंभीर हड्डी संबंधी समस्या का उपचार, एंटीबायोटिक का बेहद सीमित इस्तेमाल और क्षतिग्रस्त अंग को इस तरह जोड़ना कि वह पहले की तरह काम करने लगे, उन्हें सीखने योग्य लगा।
कटे हुए अंग को जोड़ने की तकनीक ने भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि यहां आने का उनका उद्देश्य उम्मीद से कहीं अधिक सफल रहा। वे उपचार की कई महत्वपूर्ण तकनीक सीखकर लौट रहे हैं। वह इस तरह की स्वास्थ्य सेवाओं को अपने देश में भी लागू कराएंगे।
इसी के साथ उन्होंने कहा कि यहां सीखी तकनीक के वीडियो वो जर्मनी में अपने सहयोगियों को दिखाएंगे। कई सहयोगियों ने भी भागलपुर आकर इस उपचार पद्धति को सीखने की इच्छा जताई है।
जर्मन चिकित्सकों की टीम आने की संभावना
इधर, डॉ. रहमान ने कहा कि आने वाले समय में भागलपुर मेडिकल टूरिज्म का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। जर्मनी के चिकित्सकों की टीम जल्द भागलपुर आकर उपचार की इस पद्धति को समझ सकती है। एलएमयू यूनिवर्सिटी के विभागाध्यक्ष से भी लगातार बातचीत चल रही है।
दोनों संस्थानों के बीच तकनीक के आदान-प्रदान और सहयोग को लेकर प्रारंभिक दौर की चर्चा हो चुकी है। भविष्य में समझौते की संभावना है।
इसके बाद दोनों देशों के चिकित्सक एक-दूसरे की उपचार तकनीक का इस्तेमाल और अनुभव साझा कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन चिकित्सा परामर्श की सुविधा भी विकसित की जा सकती है।
