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गंगा के उफान में बदला 200 डाल्फिन का ठिकाना, शांत पानी की तलाश में बूढ़ानाथ पहुंचीं

Published: Mon, 31 Aug 2026 10:32 PM (IST)

Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary: गंगा में बढ़े जलस्तर के कारण भागलपुर के विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य की लगभग 200 डॉल्फिन शांत ...और पढ़ें

Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary: गंगा के बढ़े जलस्तर के बीच भागलपुर में बरारी घाट के निकट अठखेलियां करती गंगा डॉल्फिन

Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary: गंगा के बढ़े जलस्तर के बीच भागलपुर में बरारी घाट के निकट अठखेलियां करती गंगा डॉल्फिन

HighLights

  1. लगभग 200 डॉल्फिन ने बाढ़ के कारण ठिकाना बदला।

  2. शांत पानी की तलाश में शहरी घाटों पर पहुंचीं।

  3. पानी घटने पर फंसने का खतरा, वन विभाग सतर्क।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary:भागलपुर स्थित सुल्तानगंज से कहलगांव तक फैले देश के एकमात्र विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य में करीब 200 गंगा डॉल्फिन का बसेरा है। इन दिनों गंगा के अप्रत्याशित रूप से बढ़े जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के कारण जलीय जीवों के प्राकृतिक ठिकाने में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। डॉल्फिन आमतौर पर स्थिर धारा, कम हलचल और शांत जलक्षेत्र को प्राथमिकता देती हैं। नदी की मुख्य धारा में तेज बहाव और अत्यधिक उफान होने के कारण डॉल्फिन का कुनबा शहर से सटे बरारी, बूढ़ानाथ और बाबूपुर आदि तटीय इलाकों की ओर शिफ्ट हो गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ का पानी घटने के बाद डॉल्फिन के अपने मूल प्राकृतिक क्षेत्र में वापस लौटने की प्रबल संभावना रहती है, किंतु जलस्तर अचानक कम होने से उनके उथले पानी या जलकुंभी वाले किनारों पर भटककर फंसने का जोखिम भी बना रहता है।

बाढ़ के बाद किनारों पर फंसने का खतरा, निगरानी जरूरी: डीएफओ

डीएफओ आशुतोष राज ने बताया कि वर्तमान में गंगा का जलस्तर काफी ऊंचा है। बाढ़ की स्थिति में तेज प्रवाह और पानी के व्यापक फैलाव के चलते डॉल्फिन अपने सामान्य पर्यावास से हटकर किनारे के शांत जलक्षेत्र में आ गई हैं।

उन्होंने बताया कि जलस्तर कम होने के बाद यदि वे किसी नए संकीर्ण क्षेत्र में फंसी रह जाती हैं, तो उनके लिए सुरक्षा का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस संवेदनशील अवधि में डॉल्फिन के सुरक्षित आवागमन और उनके नए अस्थाई ठिकानों पर वन विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए है।

  • विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य में 200 डॉल्फिन का बसेरा; गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के चलते बदला ठिकाना

  • शांत और स्थिर जलक्षेत्र की तलाश में शहर से सटे बरारी, बूढ़ानाथ और बाबूपुर घाटों के किनारे शिफ्ट हुईं डॉल्फिन

  • पानी घटने के बाद उथले पानी या किनारों पर फंसने और रास्ता भटकने की आशंका; वन विभाग ने बढ़ाई विशेष निगरानी

  • मछुआरों व नाविकों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान तेज; असामान्य स्थिति या जाल में फंसने पर तुरंत सूचना देने की अपील

  • गंगा के उफान से बदला डॉल्फिन का ठिकाना, भागलपुर के शहरी घाटों की ओर शिफ्ट हुआ कुनबा

  • बाढ़ और तेज बहाव से बचने शांत पानी की तलाश: बरारी और बूढ़ानाथ घाटों के करीब पहुंचीं 200 गंगा डॉल्फिन, पानी उतरने पर भटकने का खतरा

मछुआरों व स्थानीय लोगों के साथ मिलकर रेस्क्यू की तैयारी

वन विभाग की ओर से डॉल्फिन की सुरक्षा को लेकर गश्ती तेज करने के साथ-साथ विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के सहयोग से व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। गंगा किनारे रहने वाले ग्रामीणों, नाविकों और मछुआरों को डॉल्फिन के संरक्षण तथा उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि पानी घटने के दौरान कोई डॉल्फिन किनारे पर फंसे, तो स्थानीय लोगों के सहयोग से उसे तत्काल सुरक्षित गहरे पानी में पहुंचाया जा सके।

नदी पारिस्थितिकी की महत्वपूर्ण कड़ी है राष्ट्रीय जलजीव

गंगा डॉल्फिन केवल एक जलीय जीव नहीं, बल्कि गंगा नदी के समग्र पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इसे स्वच्छ और अविरल नदी तंत्र का प्राकृतिक संकेतक माना जाता है।

डीएफओ ने अपील करते हुए कहा कि डॉल्फिन की सुरक्षा केवल वन विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी से जुड़े स्थानीय समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि किसी क्षेत्र में डॉल्फिन जाल में फंसी, घायल या असामान्य स्थिति में दिखाई दे, तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते उसका जीवन बचाया जा सके।