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भागलपुर में खतरे के निशान के पार हुई गंगा नदी, खेत से लेकर सड़क तक पानी ही पानी

Published: Fri, 04 Sep 2026 11:34 AM (IST)

गंगा ने भागलपुर में खतरे का निशान पार कर लिया है, जिससे जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई ...और पढ़ें

सड़कों में भरा पानी। फोटो जागरण

सड़कों में भरा पानी। फोटो जागरण

HighLights

  1. गंगा भागलपुर में खतरे के निशान से 16 सेमी ऊपर बह रही।

  2. निचले इलाकों और गांवों में तेजी से फैल रहा बाढ़ का पानी।

  3. राघोपुर तटबंध पर दबाव, कटावरोधी कार्य प्रभावित, ग्रामीण पलायन कर रहे।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा ने भागलपुर में खतरे का निशान पार कर लिया है। गुरुवार रात नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई और शुक्रवार सुबह छह बजे यह 33.84 मीटर पर पहुंच गया। भागलपुर में खतरे का निशान 33.68 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।

केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के रियल टाइम आंकड़ों में जलस्तर अब भी बढ़ता हुआ दर्ज किया जा रहा है। गुरुवार दोपहर दो बजे भागलपुर में गंगा का जलस्तर 33.54 मीटर था। 16 घंटे में 30 सेंटीमीटर की वृद्धि ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है।

गंगा के उफान का असर अब तटवर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। शहर के माणिक सरकार, आदमपुर और बूढ़ानाथ के निचले इलाकों में पानी फैल रहा है।

सबौर प्रखंड के इंग्लिश, रजंदीपुर, ममलखा और लैलख समेत कई गांवों में भी बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। सड़क, खेत, बहियार और संपर्क मार्ग पानी से घिरने लगे हैं। कई स्थानों पर आवागमन प्रभावित हुआ है।

राघोपुर तटबंध पर दबाव, ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर

गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ राघोपुर जमींदारी तटबंध पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। राघोपुर गांव के सामने तटबंध का बड़ा हिस्सा पहले ही गंगा में विलीन हो चुका है।

अब करीब 150 वर्ष पुराने महादेवपुर रेल घाट से जुड़े रेलवे बांध पर आसपास के दर्जनों गांवों की निगाहें टिकी हैं। खतरे को देखते हुए राघोपुर पंचायत के कई ग्रामीण घर खाली कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

तटबंध को बचाने के लिए जहाज से बालू लाकर कटावरोधी कार्य कराया जा रहा था। जलस्तर बढ़ने के कारण शुक्रवार को जहाज का परिचालन रुक गया। इससे सुरक्षात्मक कार्य प्रभावित होने की आशंका है।

शुक्रवार सुबह 11 बजे जहाज पर ही जल संसाधन विभाग के अधिकारियों, संवेदक और पथ निर्माण मंत्री ई. शैलेन्द्र की मौजूदगी में बैठक प्रस्तावित है। इसमें जहाज का परिचालन फिर शुरू कराने और कटावरोधी कार्य तेज करने पर चर्चा होगी।

ऊपर की गंगा भी उफान पर, पटना तक खतरे से ऊपर

भागलपुर पर बढ़ते दबाव के पीछे ऊपर की गंगा का उफान भी बड़ी वजह है। शुक्रवार सुबह छह बजे सुल्तानगंज में नदी 36.10 मीटर पर थी, जो खतरे के निशान 34.50 मीटर से 1.60 मीटर ऊपर है।

कहलगांव में जलस्तर 32.07 मीटर पहुंच गया है, जो खतरे के निशान 31.09 मीटर से 98 सेंटीमीटर अधिक है। मुंगेर में भी गंगा खतरे के निशान को पार कर चुकी है।

पटना के दीघाघाट, हथिदह और गांधीघाट में भी गंगा खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। ऐसे में ऊपर से लगातार मिल रहे पानी का दबाव भागलपुर में आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।

नाथनगर में 24 घंटे में डेढ़ फीट बढ़ा पानी

नाथनगर क्षेत्र में भी बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर हो रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार 24 घंटे में करीब डेढ़ फीट पानी बढ़ा है। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम के तटवर्ती इलाकों में सैकड़ों घरों में पानी प्रवेश कर चुका है। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।

गंगा के साथ कुआ, भायना, गेरुआ और घोघा नदियों के बढ़ते जलस्तर से तोफिल, अनठावन, पकड़तल्ला, आमापुर, एकचारी स्टेशन और त्रिमोहन मार्कंडेय टोला समेत कई गांवों में पानी फैल रहा है।

नवगछिया के दियारा क्षेत्रों में भी गंगा और कोसी का पानी बढ़ने से पशुपालकों की परेशानी बढ़ गई है। लोग मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं।

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