भागलपुर। स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए महापुरुष और क्रांतिकारी भागलपुर आते रहते थे। युवाओं में जोश भरने और लोगों को जागरूक करने क लिए कई सभाएं भी की थी। वे चाहते थे कि युवा आजादी की लड़ाई के साथ-साथ समाज के विकास में भी योगदान दें।

महात्मा गांधी ने फहराया था तिरंगा

इतिहासकार रविशंकर प्रसाद चौधरी के अनुसार पूर्वी बिहार में आए भूकंप के बाद 1935 में राष्ट्रपिता महात्मा गाधी

चिल्ड्रेन पार्क स्थित भवन के सामने पधारे थे। तत्कालीन एमएलसी रामेश्वर नारायण अग्रवाल और दीप नारायण सिंह के साथ उन्होंने नगरवासियों को संबोधित किया था। इसी दौरान उन्होंने तिरंगा फहराकर आजादी की लड़ाई का बिगुल भी फूंका था। बापू समय-समय पर भागलपुर आते रहते थे।

स्वतंत्रता आदोलन के दौरान लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल 1929 में भागलपुर आए थे। वे मुंगेर में बिहार प्रातीय सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे थे। छात्रों के आमंत्रण पर टीएनबी कॉलेज पहुंचे और यहा पर अहिंसा व किसानों के प्रति छात्रों के कर्तव्य पर प्रकाश डाला था।

प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बीएचयू के कुलपति के रूप में 1946 में भागलपुर आए थे। यहां सीएमएस ग्राउंड में उन्होंने भागलपुरवासियों को संबोधित किया था। वे शिक्षाविद् निशिकात मिश्रा के आमंत्रण पर भागलपुर आए थे और लोगों को समय के महत्व के बारे में बताया था। उन्होंने देश की आजादी और सामाजिक विकास पर भी चर्चा की थी।

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू दो बार भागलपुर आए, जबकि एक बार एक संस्थान के उद्घाटन के लिए पधारे थे। 1957 में सैंडिस कंपाउंड ग्राउंड में आयोजित सभा में उन्होंने युवाओं में सामाजिक विकास के लिए जोश भरा था। उन्होंने आजादी की लड़ाई में महापुरुषों की कुर्बानी की याद दिलाई थी।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर तिलकामाझी भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर 10 जनवरी 1964 से 03 मई 1965 तक रहे। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया था।

By Jagran