भागलपुर। पूर्व बिहार के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के आकस्मिक विभाग को 'इमरजेंसी' की दरकार है। इसपर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है।

दरअसल, यहां के आकस्मिक विभाग में सामान्य मरीजों के साथ ही संक्रामक रोगों (टीबी-एमडीआर टीबी) से ग्रसित मरीजों को भर्ती किया जाता है। काउंटर पर भी दोनों तरह के मरीज एक साथ रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। जांच रिपोर्ट आने तक दोनों तरह के मरीजों को एक साथ रखा जाता है। इस दौरान टीबी मरीजों के खांसने-छींकने या उसके बलगम के संपर्क में आने से सामान्य मरीज भी संक्रमित हो सकते हैं। चिकित्सक भी इस बात को मानते हैं पर व्यवस्था के आगे उनकी कुछ चल नहीं पाती।

इमरजेंसी में भर्ती होते हैं टीबी के मरीज

जेएलएनएमसीएच में आठ जिलों के मरीज इलाज करवाने आते हैं। किसी भी रोग से ग्रसित मरीज की हालत बिगड़ने पर इमरजेंसी में ही उन्हें भर्ती किया जाता है। यहां प्रतिमाह 30 से ज्यादा टीबी रोग से ग्रसित मरीज भर्ती होते हैं। जांच में संक्रामक रोग की पुष्टि होने पर उन्हें इंडोर मेडिसीन के टीबी एंड चेस्ट विभाग में रेफर किया जाता है। जो मरीज मल्टी ड्रग रेसिस्टेड (एमडीआर टीबी) से ग्रसित होते हैं, उन्हें एमडीआर टीबी विभाग रेफर किया जाता है।

जुलाई-अगस्त में अधिक मरीज हुए भर्ती

जुलाई-अगस्त माह में 30 से ज्यादा टीबी मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती किया जा चुका है। इनके नाम रजिस्टर में दर्ज हैं। 10 अगस्त को भी इमरजेंसी में एमडीआर टीबी के मरीज को भर्ती किया गया है। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर भी बिना मास्क लगाए टीबी मरीज रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। इस दौरान खांसने-छींकने से दूसरे मरीज से इस रोग से ग्रसित हो सकते हैं। संदिग्ध टीबी मरीजों को लिए अलग कमरा नहीं

अस्पताल में टीबी के संदिग्ध मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग कमरा नहीं है। यही वजह है कि उन्हें भी सामान्य मरीजों के साथ ही भर्ती किया जाता है। ऐसी स्थिति में 2025 तक टीबी उन्मूलन अभियान के सफल होने की उम्मीद कम है।

दो वर्षों में चार सौ से ज्यादा एमडीआर मरीजों को किया गया है भर्ती

मेडिकल कालेज अस्पताल में 2021 के जनवरी से दिसंबर तक 391, 2022 के जनवरी से जुलाई तक 182 एमडीआर मरीजों का इलाज किया गया। इसके अलावा गत वर्ष करीब छह हजार टीबी के मरीजों का इलाज कर दवा दी जा रही है। इनमें से कई मरीजों को भर्ती भी किया गया। इनमें इस वर्ष 78 एमडीआर के मरीज शामिल हैं।

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केस स्टडी 01

34 वर्षीय हरिनंदन मंडल को 10 अगस्त को इमरजेंसी में भर्ती किया गया। रजिस्टर में एमडीआर टीबी अंकित है। मरीज बांका जिला का निवासी है। केस स्टडी 02

11 अगस्त को 45 वर्षीय बुद्धन सादा को इमरजेंसी विभाग में भर्ती किया गया। खगड़िया जिला के मानसी के निवासी हैं। रजिस्टर में टीबी अंकित है। केस स्टडी 03

नाथनगर प्रखंड के गोसाईंदासपुर के रामचंद्र मंडल को भी इमरजेंसी में भर्ती किया गया। रजिस्टर में टीबी रोग से ग्रसित होना लिखा हुआ है।

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कोट :

संदिग्ध टीबी मरीजों के लिए अलग कमरा होना चाहिए। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से बात की जाएगी। अगर टीबी मरीजों को सामान्य मरीजों के साथ भर्ती किया जाता है तो वे भी टीबी से ग्रसित हो सकते हैं।

- डा. कुमार गौरव, प्रभारी अधीक्षक, जेएलएनएमसीएच

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कोट :-

जरूरी नहीं है कि सामान्य मरीज भी टीबी से ग्रसित हो जाएं। एमडीआर टीबी और सामान्य टीबी मरीजों को भर्ती करने के लिए अलग-अलग विभाग है।

- डा. शांतनु घोष, अध्यक्ष टीबी एंड चेस्ट विभाग

Edited By: Jagran