भागलपुर। तेज हवा और बारिश के बीच मंगलवार की शाम आधा दर्जन से अधिक उपकेंद्रों और फीडरों की बिजली गुल हो गई। शाम 4.50 बजे गायब हुई बिजली एक घंटे बाद 6.10 बजे बहाल कर दी गई। इस दौरान बिजली विभाग की टीम सभी प्रभावित उपकेंद्रों और फीडरों में लगाया गया।

तेज हवा और बारिश के बीच बरारी, औद्यौगिक, डेडीकेटर फीडर, जेल पीएसएस, खलीफाबाग, नया बाजार, मायागंज, पावर हाउस, नाथनगर पीएसएस की बिजली ठप हो गई। सिविल सर्जन, टीटीसी, तिलकामांझी की आपूर्ति भी कुछ देर के लिए प्रभावित हुई। तेज हवा और बारिश के बीच ठप हुई आपूर्ति को एक घंटे के अंदर बहाल कर दी गई। कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार गुप्ता के निर्देश पर सहायक और कनीय अभियंताओं की टीम भी आपूर्ति व्यवस्था बहाल होने तक निगरानी करती रही।

जगदीशपुर, अलीगंज, सबौर क्षेत्र में सात घंटे तक ठप रही आपूर्ति

तेज आंधी और बारिश के साथ जगदीशपुर, सबौर और अलीगंज ग्रामीण क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित रही। सात घंटे तक बिजली गायब रही। तेज आंधी और बारिश के कारण 33 केवीए के तार तीन जगह टूट कर गिर गए। सबौर ग्रिड के फेल हो जाने के कारण तीनों क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। इंसुलेटर के क्षतिग्रस्त होने और सबौर में बिजली के तीन पोल के क्षतिग्रस्त होने से आपूर्ति ठप हो गई। बिजली विभाग की टीम सहायक अभियंता दीपक कुमार चौधरी के नेतृत्व में आपूर्ति बहाल करने की कोशिश में लगी रही। हबीबपुर, अलीगंज इलाके में भी टूटे तार को जोड़ने और क्षतिग्रस्त इंसुलेटर को दुरुस्त किया गया। सहायक अभियंता ने बताया कि बिजली आपूर्ति देर रात दुरूस्त कर ली जाएगी। दो साल बीत गए, बिजली के तारों को भूमिगत करने का नहीं हुआ काम

भागलपुर नगर निगम और कहलगांव नगर पंचायत क्षेत्र के लिए 387 करोड़ की लागत से आइपीडीएस योजना के तहत शहर के बिजली तारों को भूमिगत करना था। शहरी क्षेत्र में छह नए पावर सब स्टेशन भी बनना था। बिजली के तारों से होने वाले खतरे। जरा सी तेज हवा और बारिश में बिजली घंटों काट लेने की मजबूरी से निजात दिलाने की योजना थी। दो साल बीत गए लेकिन अबतक शहरी क्षेत्र के बिजली तारों को भूमिगत बनाने की योजना लटकी पड़ी है। शहरी क्षेत्र के बरारी, जीरोमाइल, हाउसिंग कालोनी क्षेत्र में सुरक्षित कवर वाले केबल और ट्रांसफार्मर लगाने का काम आरंभ तो हुआ लेकिन बिजली के तारों को भूमिगत करने का काम नहीं हो सका है। विद्युत विनियामक आयोग परामर्शदात्री समिति के सदस्य अशोक जीवराजिका कहते हैं कि 33 और 11 हजार केवी के तारों को सुरक्षा कारणों से भूमिगत किया जाना जरूरी है। इससे बिजली उपभोक्ताओं को तेज हवा या बारिश में बिजली काटने की परेशानी से निजात मिल सकेगा।

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021