भागलपुर, जेएनएन। Eid Mubarak 2020: शहर से लेकर गांव तक सोमवार को सादगी के साथ ईद मनाई गई। ईद की नमाज खुशियों के साथ अदा की गई। लेकिन लॉकडाउन की वजह से मस्जिदों व ईदगाहों में बड़ी जमात के साथ नमाज अदा नहीं हो सकी।

अकीदतमंदों ने शारीरिक दूरी बनाकर अपने-अपने घरों में ईद की नमाज पढ़ी, जबकि मस्जिदों में सिर्फ चार से पांच लोगों ने नमाज अदा करते हुए घर-परिवार, समाज के साथ देश में अमन व चैन की दुआ मांगी। कोरोना वायरस के संक्रमण को समाप्त करने की विशेष दुआ की गई।

नमाज के बाद दी मुबारक 

ईद की नमाज को सादगी के साथ अदा करते हुए लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकवाद दी। सोमवार की सुबह शाह मार्केट स्थित खानकाह पीर दमडिय़ा के सज्जादानशीं सैयद शाह हसन मानी और नायब सज्जादानशीं शाह फखरे आलम ने एक-दूसरे को बधाई दी। इस दौरान देश की सलामती और कोरोना वायरस जैसी महामारी से निजात मिलने की दुआ की गई। वहीं नाथनगर, चंपानगर, मोमीनटोला, कबीरपुर, नरगा, असानंदपुर, जब्बारचक, तातारपुर, बरहपुरा, हुसैनाबाद, मौलानाचक, शाहजंगी, बरारी व मायागंज आदि क्षेत्रों में लोगों ने शारीरिक दूरी का पालन कर घरों पर ईद की नमाज अदा की।

बुराइयों को दूर करता है रोजा

सैयद शाह हसन मानी ने कहा कि रमजान के पवित्र महीने में पूरे 30 रोजा रखकर इमान वालों ने परहेजगार बनकर जिंदगी गुजारने का मुकम्मल कर लिया है। रोजा रखने से इंसान को सब्र व धीरज रखने का मलिका मिल जाता है। साथ ही असहाय और गरीबों की भूख, प्यास का वह पूरा अहसास भी कर लेता है। जिसके द्वारा रोजा रखने वालों को दूसरों की मदद करने की प्रेरणा मिल जाती है। रोजा इंसान के दिलों में बुराइयों को निकालकर अच्छाइयां लाने का काम करता है। जब इंसान का हृदय स्वच्छ हो जाता है तो फिर वह नेक इंसान बन जाता है। और सबकी भलाई के लिए काम करता है।

पुराने कपड़ों से चला काम

ईद के दिन लोग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों में नमाज अदा करने जाते थे। मोजाहिदपुर के नवी हसन व अशफाक ने बताया कि इस बार लॉकडाउन की वजह से इस बार कई लोगों ने पुराने कपड़ों के साथ ईद मनाई। ईद मिलन समारोह का भी आयोजन नहीं किया गया। वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण ने ईद का उल्लास फीका-फीका रहा।

मेले का नहीं हुआ आयोजन

शाहजंगी व तातारपुर में ईद पर हर साल की तरह लगने वाले मेले इस बार नदारद रहे। इससे बच्चों का उत्साह थोड़ा फीका रहा। बच्चे अपने स्वजनों के साथ खरीदारी के लिए निकलते थे। इसके साथ बरहपुरा आदि ईदगाह के बाहर खिलौना, झूले वाले व आसपास खान-पान की दुकान खोलने वाले छोटे-छोटे फुटकर व्यवसायी पर असर पड़ा। वहीं ईदगाह में नमाज अदा करने के बाद लोग दान भी किया करते थे। इस बार दान भी नहीं कर सके।

सोशल मीडिया पर दी मुबारक 

शारीरिक दूरी का पालन करते हुए ईद की मुबारकबाद दिया और पुरानी गलतियों को भुलाया। बहुत सारे रिश्तेदारों के घर भी नहीं जा सके। इस बार की ईद में लोग गिले-शिकवे को भुलाने के लिए मोबाइल का सहारा लिया। लॉकडाउन की वजह से सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। कई लोग घर नहीं लौट सके। इसके लिए वीडियो कॉल के माध्यम से स्वजनों व दोस्तों को बधाई दी।

सुरक्षा के सख्त इंतजाम

ईद की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए। सुरक्षा बल लगातार गश्त लगा रहे थे। मस्जिदों व ईदगाहों के पास विशेष चौकसी बरती गई। मस्जिदों के बाहर पुलिस तैनात रही। प्रशासन व उलेमाओं की अपील का माकूल असर ईद के त्योहार पर दिखा।

लजीज व्यंजनों का लिया आनंद

घरों पर गृहणियों ने परिवार के सदस्यों व अतिथि के लिए रात भर जाग कर विभिन्न प्रकार के सेवइयां बनाई। दहीबड़ा, छोले-भटोरे, कई तरह का हलवा आदि व्यंजन भी थाली में परोसा गया। बच्चों की मांग पर पकवान बनाने में महिलाएं व्यस्त रहीं।

जरूरतमंदों की मदद कर मिली तसल्ली

कोरोना वायरस की वजह से पहली बार लोगों ने घर पर इबादत किया। जिला शिया वक्फ कमेटी के सचिव जिजाह हुसैन ने बताया कि इस बार नया कपड़ा नहीं खरीदा। इस पैसे से वैसे जरूरतमंदों की मदद की गई। इन्हें मदद देकर दिल में तसल्ली हुई। उन्होंने कहा कि उनके तीन भाई दिल्ली में रहते हैं। लॉकडाउन की वजह से घर नहीं लौट सके। इससे त्योहार का उत्साह फीका-फीका रहा।

Posted By: Dilip Shukla

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