भागलपुर [संजय कुमार सिंह]। चंपा नदी फिर से जी उठेगी। इसकी धारा लौट आएगी। अभी इसमें पूरी संभावना है। बस थोड़ा सा प्रयास करने की जरूरत है। चंपा के पुनर्जीवन की संभावना तलाशने भागलपुर पहुंचे भूगर्भ विज्ञानी केजी व्यास ने यह बात कही। वे दैनिक जागरण के अभियान 'कहां गुम हो गई चंपा' को गति देने के लिए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से यहां आए थे।

चंपा नदी के पुनर्जीवन की पड़ताल के लिए व्यास सबसे पहले इसके उद्गम स्थल बांका जिले के बेरमा गांव गए। वहां पर नदी की स्थिति का अध्ययन किया। वहां से नदी के किनारे-किनारे सबौर तक पहुंचे, जहां चंपा नदी गंगा में मिलती है।

पूरे दिन की पड़ताल के बाद उन्होंने पाया कि वर्षों से हो रहे अत्याचार के बाद भी चंपा का निचला स्तर जीवित है। इसकी धारा वापस लाने के लिए आसपास के जलाशयों एवं तालाबों को समृद्ध करना होगा। ताकि इनका पानी चंपा को समृद्ध करता रहे।

इसके साथ ही नदी के मार्ग से अतिक्रमण हटाना होगा। यह शासन प्रशासन के साथ-साथ जन सहयोग से ही संभव हो पाएगा। नदी के पुनर्जीवन के लिए इसकी जलधारा को गति देनी होगी। उन्होंने कहा कि 70 साल पहले नदी जैसे कलकल करती थी, भले उस स्वरूप में न आ पाए, लेकिन नदी में पूरे वर्ष पानी रह सकता है। पुनर्जीवन की संभावना तलाशने के दौरान व्यास ने चंपा के किनारे बसे गांव के लोगों से भी मुलाकात की।

केजी व्यास को हाल में ही बिहार सरकार ने नदी के पुनर्जीवन के लिए बतौर विशेषज्ञ आमंत्रित किया था। इन्होंने नदियों के प्रवाह को वापस लाने के लिए नियमावली भी बनाई है। चंपा नदी की धारा वापस लाने के लिए दैनिक जागरण की ओर से चलाए जा रहे अभियान की व्यास ने सराहना की। इसके पहले अभियान को आगे बढ़ाने के लिए जलपुरुष राजेन्द्र सिंह भी भागलपुर आए थे। चंपा नदी के पुनर्जीवन की खोज करने के दौरान जल जन जोड़ो अभियान के संयोजक पंकज मालवीय, डॉ. आलोक कुमार आलोक, अश्वनी कुमार व सुनील कुमार सिंह सहित अन्य ग्र्रामीण भी साथ थे।

चंपा नदी अभी जिंदा है, बस हो ईमानदार कोशिश

चंपा नदी को बचाने के लिए सामाजिक स्तर पर कमेटी बनाई जाएगी। इसके माध्यम से जनजागरुकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। चंपा नदी के वैभव को लौटाने की मुहिम छेड़ी जाएगी। शासन और प्रशासन को इससे अवगत कराया जाएगा। बुधवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित परिचर्चा में शहर के प्रबुद्धजनों ने आम सहमति से यह निर्णय लिया।

कहां गुम हो गई चंपा अभियान के तहत आयोजित परिचर्चा में भूगर्भ विज्ञानी केजी व्यास भी मौजूद थे। उन्होंने बांका जिला के बेरमा स्थित चंपा नदी के मुहाने से लेकर चंपा पुल तक नदी का सर्वे करने के बाद प्रबुद्धजनों से अपना अनुभव साझा किया। व्यास ने कहा, चंपा नदी को जीवित करने के लिए ईमानदार कोशिश होनी चाहिए।

गंगा के प्रभाव के कारण चंपा के पुनर्जीवन की काफी संभावना है। इसे समाज के सहयोग के बिना नहीं किया जा सकता है। थोड़ी सफलता में निश्चिंत नहीं होना होगा, बल्कि इस मुहिम को मुकाम तक पहुंचाने की जरूरत है। नदी वही होती है जिसमें साल भर बहाव चलता रहे। बरसात के बाद नदी में पानी का प्रवाह कम हो जाता है। चानन नदी के साथ भी यही है। चानन से निकली चंपा की धारा गंगा में जाकर मिलती है। इसकी भौगोलिक स्थिति का आकलन करना होगा। नदी में पानी कहां से आए, बारिश के बाद पानी की उपलब्धता व बारिश का पानी कहां गया, इस गणित को समझना होगा।

केजी व्यास ने कहा, नदी हर साल बालू लेकर आती है। रेत निकालने के दौरान नदी की गीली परत तक खोद लेते हैं। यह नदी को नुकसान पहुंचाता है। डीप बोरिंग और पंपसेट से सिंचाई के चलते जलस्तर गिर रहा है। इससे भी नदी प्रवाह प्रभावित हुआ है। नदी की धारा बरसाती पानी से नहीं बल्कि भूगर्भ जल संचयन लौटाई जा सकती है। नदी को 12 माह तक भूगर्भ से पानी मिलता है।

इसके भूगर्भ जल को कैसे बढ़ाया जाय इस पर कार्य करना होगा। नदी के किनारे वाले क्षेत्रों और गांवों में तालाब, पोखर आदि का निर्माण कराना होगा। ताकि, बरसात के बाद नदी का जलस्तर घटने पर भूगर्भ जल का पानी मिल सके। इस मौके पर दैनिक जागरण के महाप्रबंधक राजाराम तिवारी व संपादकीय प्रभारी अश्विनी भी मौजूद थे।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस