भागलपुर, जेएनएन। दुर्गापूजा की दसवीं को मां दुर्गे की प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला सोमवार की दोपहर से शुरू हो गया। विभिन्न पूजा समितियों और श्रद्धालुओं ने धार्मिक रीति रिवाज का पालन करते हुए मां दुर्गा की प्रतिमाओं को मुसहरी घाट, बरारी सीढ़ी घाट, पुल घाट सहित विभिन्न तालाबों व पोखरों में प्रवाहित किया जाएगा। शाम चार बजे तक 6 प्रतिमाओं को विसर्जित किया गया। विसर्जन के लिए नगर निगम ने रविवार की रात को ही सारी तैयारी पूरी कर ली थी। पूजा पंडालों में महिलाओं ने विदाई के पहले देवी दुर्गा को खोंइछा दिया। महिलाओं ने विदाई गीत भी गाईं। पंडालों से प्रतिमाओं को निकालने के समय आयोजकों के चेहरे पर मायूसी छाई थी। इस बार कोरोना महामारी और विधानसभा चुनाव को लेकर पूजा समितियों को कई नियमों से बंधना पड़ा।

मां दुर्गा की प्रतिमा शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ देर शाम मुसहरी घाट पहुची।मायागंज की प्रतिमा सबसे पहले विसर्जित की गई। देवी दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रलगी रही।

 

घाट पर गोताखोरों थे तैनात

प्रशासन की ओर से मुसहरी घाट पर तीन जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। दो मोटरबोट तथा तीन गोताखोरों की व्यवस्था की गई है। प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी विधि-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विसर्जन होने तक मुसहरी घाट पर मौजूद थे।

ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा साल में एक बार अपने मायके आती हैं। जितने दिन तक मां मायके में रुकती हैं उसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि मां दुर्गा मायके से विदा होकर जब ससुराल जाती हैं, तो सिंदूर से उनकी मांग भरी जाती है। साथ ही दुर्गा मां को पान और मिठाई भी खिलाई जाते हैं। हिंदू धर्म में सिंदूर का बहुत बड़ा महत्व होता है। सिंदूर को महिलाओं के सुहाग की निशानी कहते हैं। सिंदूर को मां दुर्गा के शादी शुदा होने का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवरात्रि पर सभी शादी शुदा महिलांए एक दूसरे पर सिंदूर लगाती हैं।

 

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