भागलपुर टाउन हॉल में सजेगा 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' का रंगमंच; तिलक, अरविंदो व सावरकर के विचारों की दिखेगी त्रिवेणी
Yugpravartak Dr Hedgewar Play: भागलपुर के टाउन हॉल में 27 अक्टूबर 2026 को 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' महानाट्य का मंचन होगा, ...और पढ़ें

Yugpravartak Dr Hedgewar Play: भागलपुर टाउन हॉल में 27 अक्टूबर को मंचित होने वाले महानाट्य 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' का दृश्य
HighLights
डॉ. हेडगेवार के संघर्षमय जीवन और विचारों का मंचन।
तिलक, अरविंदो, सावरकर के विचारों का प्रभाव दर्शाया जाएगा।
भागलपुर टाउन हॉल में निःशुल्क ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Yugpravartak Dr Hedgewar Play: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के संघर्षमय जीवन, क्रांतिकारी विचारों और संघ सृजन की ऐतिहासिक गाथा आगामी 27 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को भागलपुर के टाउन हॉल में जीवंत होगी।
बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग तथा 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार नाट्य आयोजन समिति' द्वारा आयोजित इस महानाट्य 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' का मंचन सायं 4:30 बजे से किया जाएगा। नागपुर की सुविख्यात सांस्कृतिक संस्था 'नादब्रह्म' की ओर से प्रस्तुत किए जा रहे इस नाटक का यह 68वां विशेष मंचन होगा, जिसमें दर्शकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है।
तिलक, अरविंदो और सावरकर के विचारों की त्रिवेणी
यह नाट्य प्रस्तुति केवल एक जीवनी भर नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना के पुनरुत्थान का एक जीवंत दस्तावेज है। नाटक में दिखाया जाएगा कि डॉ. हेडगेवार का वैचारिक आधार लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के कर्मयोग, महर्षि अरविंदो की दिव्य वाणी और स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की प्रखर राष्ट्रभक्ति की त्रिवेणी से सिंचित था।
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मंच पर उन ऐतिहासिक क्षणों को भी प्रमुखता से उकेरा जाएगा, जब उन्होंने कांग्रेस के सत्याग्रहों में अग्रणी भूमिका निभाते हुए दो बार कठोर कारावास की सजा काटी थी। इसके साथ ही तत्कालीन दौर में राष्ट्रीय आंदोलन के भीतर तुष्टिकरण की नीतियों और विफल सामाजिक प्रयोगों के प्रति उनके अंतर्द्वंद्व और वैचारिक असहमति के दौर को भी बेबाकी से दर्शाया जाएगा।
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नेताजी सुभाष से मंत्रणा और मुट्ठी भर स्वयंसेवकों से वटवृक्ष बनने की यात्रा
नाटक के संवेदनशील और ओजस्वी दृश्य दर्शकों को उस कालखंड में ले जाएंगे जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. हेडगेवार के बीच देश की आजादी और सशस्त्र क्रांति के बीजारोपण को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हुआ था। नाट्य रूपांतरण में दिखाया जाएगा कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति ने अपने असाधारण राष्ट्रप्रेम के बल पर वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन महज मुट्ठी भर बाल-किशोर स्वयंसेवकों को साथ लेकर संगठन का बीजारोपण किया था।
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वही छोटा सा प्रयास आगे चलकर देश और दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक व सामाजिक संगठन बनकर उभरा। यह नाटक संदेश देता है कि यह महज एक रंगमंचीय प्रस्तुति नहीं, बल्कि सुप्त हिंदू जनमानस और राष्ट्रीय चेतना को जगाने का एक सांस्कृतिक आंदोलन है।
सत्ता, संत और संघ के दिग्गजों की रहेगी मौजूदगी
इस भव्य नाट्य मंचन के गवाह बनने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक जगत के कई शीर्ष चेहरे भागलपुर पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नवगछिया स्थित श्री शिवशक्ति योग पीठ के पीठाधीश्वर और श्री उत्तरतोताद्रि मठ विभीषणकुंड अयोध्या के उत्तराधिकारी जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भागलपुर के विभाग संघचालक नरेश मोहन झा, बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास मंत्री नितीश मिश्र तथा पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र उपस्थित रहेंगे।
नाटक के लेखक डॉ. अजय प्रधान, निर्देशक सुबोध सुर्जिकर, संगीतकार शैलेश दाणी और निर्माता पद्माकर धानोरकर हैं। वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रविजी भुसारी इस नाट्य अभियान के मुख्य संरक्षक हैं। आयोजन समिति ने भागलपुर की प्रबुद्ध जनता, साहित्यकारों, रंगकर्मियों और राष्ट्रभक्त युवाओं से समय पर टाउन हॉल पहुंचकर इस ऐतिहासिक प्रस्तुति का साक्षी बनने का आह्वान किया है।
