डॉ. हेडगेवार व गुरुजी को सामने देख भावुक हुए लोग! सजीव हुआ 1925 का दौर, RSS शताब्दी वर्ष पर भागलपुर में महानाट्य मंचन
RSS Centenary Bhagalpur: भागलपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर 'युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' महानाट्य का सफल मंचन ...और पढ़ें

RSS Centenary Bhagalpur: भागलपुर टाउन हॉल में आयोजित महानाट्य 'युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते स्वामी आगमानंद जी महाराज
HighLights
भागलपुर में 'युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' महानाट्य का मंचन।
RSS के शताब्दी वर्ष पर संस्थापक का जीवन दर्शाया।
नागपुर की 'नादब्रह्म' संस्था ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। RSS Centenary Bhagalpur: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के गौरवशाली अवसर पर भागलपुर का ऐतिहासिक टाउन हॉल राष्ट्रभक्ति, स्वाधीनता संग्राम और भावुकता के अनूठे संगम का साक्षी बना। संघ के संस्थापक और आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के संघर्षमय जीवन, देश के स्वाधीनता आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका और संघ सृजन की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित भव्य महानाट्य 'युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार'का सफल मंचन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के संपूर्ण गायन से हुआ। यह आयोजन बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया गया।
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नागपुर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था 'नादब्रह्म' के 40 सदस्यीय कलाकार दल ने अपने सजीव और ओजस्वी अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार नाट्य आयोजन समिति' द्वारा आयोजित इस महानाट्य का यह देश भर में 68वां विशेष मंचन था। नाटक में मुख्य भूमिका निभा रहे अभिनेता सतीश खेकाळे ने डॉ. हेडगेवार और अमोल तेलपांडे ने माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (श्री गुरुजी) के चरित्र को जीवंत कर दिया।
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स्वामी आगमानंद ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन नवगछिया स्थित श्री शिवशक्ति योग पीठ के पीठाधीश्वर एवं श्री उत्तरतोताद्रि मठ विभीषणकुंड अयोध्या के उत्तराधिकारी जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी आगमानंद जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र, महापौर डॉ. वसुंधरा लाल, विधायक रोहित पांडेय, विधायक मुरारी पासवान, विधायक मिथुन यादव, विधायक पूरण लाल टुडू, आरएसएस के भागलपुर विभाग संघचालक नरेश मोहन झा, विभाग सह संघचालक डॉ. राणा प्रताप सिंह, महानगर संघचालक डॉ. चंद्रशेखर साह और दक्षिण बिहार प्रांत के सह कार्यवाह बालमुकुंद गुप्त मंचासीन रहे।
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संघ ने जिंदा रखी राष्ट्रभक्ति
स्वामी आगमानंद जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने आह्वान किया था—'गर्व से कहो हम हिंदू हैं'; संघ ने इसी विचार को अपना ध्येय वाक्य बनाया और छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन मूल्यों को आदर्श मानकर कार्य किया। आज संपूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति का ध्वज शान से लहरा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के भाव को यदि किसी ने निष्स्वार्थ भाव से जिंदा रखा है, तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। डॉ. हेडगेवार और श्री गुरुजी ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
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1925 की स्मृतियां हुईं सजीव
मंचन के दौरान ओजस्वी संवादों ने दर्शकों को सीधे 1920 और 1930 के दशक में पहुंचा दिया। नाटक में स्पष्ट दिखाया गया कि संघ स्थापना से पूर्व कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य को लेकर डॉ. हेडगेवार की नीति पूरी तरह स्पष्ट थी, हालांकि महात्मा गांधी और अन्य कांग्रेसी नेता उस समय इसके पूर्ण पक्ष में नहीं थे। इसके बाद 1925 में विजयदशमी के दिन संघ की स्थापना, संगठन का नामकरण, शाखा पद्धति, संघ स्थान की सफाई, पहला गुरु पूर्णिमा उत्सव, सरसंघचालक की घोषणा और संघ शिक्षा वर्ग के दृश्य देख दर्शक रोमांचित हो उठे।
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अंतिम दृश्य में नम हुईं सबकी आंखें
लोकमान्य तिलक के कर्मयोग, महर्षि अरविंद के आध्यात्मिक राष्ट्रवाद, वीर सावरकर की प्रखर राष्ट्रभक्ति और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ सशस्त्र क्रांति पर हुए विचार-विमर्श को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया। नाटक के उत्तरार्ध में जब डॉ. हेडगेवार अस्वस्थ हुए और उन्होंने संघ शिक्षा वर्ग में सर्वाधिकारी के रूप में श्री गुरुजी को दायित्व सौंपते हुए अंतिम विदाई ली, तो पूरा टाउन हॉल करुणा से भर गया और दर्शकों की आंखें नम हो गईं। 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम' और 'हिंदुत्व' के उद्घोष से पूरा परिसर गूंजता रहा।
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टाउन हॉल में पैर रखने की जगह नहीं
महानाट्य को लेकर शहरवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। टाउन हॉल के भीतर एक भी कुर्सी खाली नहीं बची थी और गैलरी तक खचाखच भरी रही। भारी भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति ने टाउन हॉल परिसर के बाहर बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई, जहां सैकड़ों लोग अंत तक खड़े होकर नाटक देखते रहे। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह (डॉ. डी. आर. सिंह) के अलावा तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय और भूपेंद्र नारायण विश्वविद्यालय मधेपुरा पूर्व कुलपति प्रो डॉ. अवध किशोर राय (प्रो. डॉ एके राय), कुंदन बाबा, भजन सम्राट डॉ. हिमांशु मोहन मिश्र 'दीपक जी', डॉ. बिहारी लाल, श्वेता सुमन, स्मार्त परमहंस आचार्य पंकज अथर्व, दिलीप शास्त्री सहित काफी संख्या गण्यमान्य लोग मौजूद थे।
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नाट्य आयोजन समिति के कार्यकर्ता सक्रिय
मंच संचालन विभाग प्रचार प्रमुख अजीत घोष ने किया, जबकि आयोजन समिति प्रमुख नीरज शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर विभाग प्रचारक सुरेन्द्र जी, हरविन्द नारायण भारती, पूजा भारती, प्रज्ञा भारती, करुणा देवी, प्रो. राजीव कुमार सिंह, योगी राजीव मिश्रा, योगेश पांडेय, रतन भलोटिया, श्रीधर मिश्र, रवि कुमार सिन्हा, चंद्रशेखर प्रसाद, संदीप शर्मा, राकेश सिन्हा, त्रिपुरारी तिवारी, अभिनव कुमार सिंह, दिलीप निराला, डॉ. रोशन सिंह, श्वेता सिंंह, सुमन सोनी, स्वीटी शेखर, मृगांक शेखर, हर्ष शांडिल्य और नीरज कुमार सहित भाजपा, विहिप, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती, एबीवीपी और श्री शिवशक्ति योगपीठ के सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने भगवा ध्वज पर श्रद्धापूर्वक पुष्पार्चन किया।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर भागलपुर टाउन हॉल में आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर आधारित महानाट्य 'युग प्रवर्तक डॉ. हेडगेवार' का 68वां सफल मंचन किया गया।
नागपुर की सांस्कृतिक संस्था 'नादब्रह्म' के 40 सदस्यीय दल के अभिनेता सतीश खेकाळे ने डॉ. हेडगेवार और अमोल तेलपांडे ने द्वितीय सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर (श्री गुरुजी) का सशक्त अभिनय किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन श्री शिवशक्ति योग पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी आगमानंद जी महाराज, बिहार सरकार के मंत्री ई. कुमार शैलेंद्र, महापौर डॉ. वसुंधरा लाल और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ज्येष्ठ प्रचारक श्री रविजी भुसारी के संरक्षण तथा नागपुर की सांस्कृतिक संस्था 'नादब्रह्म' की निर्मिति में प्रस्तुत महानाट्य 'युगप्रवर्तक डॉ. हेडगेवार: संघ सृजन का भव्य नाट्याविष्कार' का लेखन डॉ. अजय प्रधान ने किया है। इस भव्य प्रस्तुति के निर्माता पद्माकर धानोरकर, दिग्दर्शक सुबोध सुर्जिकर और संगीतकार शैलेश दाणी हैं। वहीं, प्रचार एवं प्रसार प्रमुख का दायित्व रविंद्र सहस्त्रबुद्धे तथा तांत्रिक एवं व्यवस्थापक का जिम्मा अरविंद उपाध्ये ने संभाला है।
