भागलपुर [जेएनएन]। शहर में डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। सरकारी अस्पतालों के साथ प्राईवेट क्लीनिकों और नर्सिग होम में मरीजों की भीड़ लगी है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन की तंद्रा नहीं टूटी है। डेढ़ महीने पूर्व ही डेंगू ने शहर में दस्तक दे दी थी। इसका कहर अभी भी जारी है। बावजूद इसके एंटी लार्वा स्प्रे कराकर लोगों को इस घातक बीमारी से बचाने के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। पद पर बैठे लोगों को यहां तक पता नहीं है कि कहां-कहां से डेंगू के मरीज अस्पताल व नर्सिंग होम पहुंच रहे हैं। जिस विभाग के पास लार्वा मारने की जवाबदेही है, उसके पास राशि का अभाव है। जहां पर मलेरिया विभाग है और सिविल सर्जन बैठते हैं, वहां का इलाका भी डेंगू से बचा नहीं है। फॉगिंग के लिए नगर निगम की ओर मुंह बाए खड़ा है। नगर निगम भी फॉगिंग के नाम पर सिर्फ बयानबाजी तक ही सीमित है। गिने-चूने इलाके में ही फॉगिंग कराई जा रही है।

डेंगू का मच्छर जाग चुका है और इसके डंक से शहर के तीन से अधिक लोगों को जान गंवानी पड़ी। विभिन्न क्लीनिकों और अस्पतालों में डेढ़ सौ के करीब लोगों का इलाज चल रहा है, जबकि दो हजार से अधिक लोग अपना इलाज करा चुके हैं। बावजूद इसके डेंगू के डंक से निबटने की दिशा में सिस्टम सोया हुआ है। शहर में कई स्थानों पर डेंगू के मच्छर पनप रहे हैं, लेकिन इनके सफाये के लिए न स्वास्थ्य विभाग अलर्ट दिख रहा और न नगर निगम ही। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक उपचार मुहैया कराने के मद्देनजर वह तैयारियां शुरू नहीं की है, जिनकी दरकार है।

बारिश में पनपता डेंगू का मच्छर : बारिश में डेंगू का मच्छर पनपता है। इसके तेजी से पनपने के लिए 16 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान और 60-80 डिग्री सेंटीग्रेड आद्र्रता मुफीद होती है।

कैसे फैलता है डेंगू : मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के डंक मारने से होने वाले संक्रमण से डेंगू फैलता है। यह मच्छर दिन में डंक मारता है तो रक्त में डेंगू के वायरस प्रवेश कर जाते हैं। 8 से 10 दिन में रोग के लक्षण दिखने लगते हैं।

यूं संभव है इलाज : डेंगू बुखार का इलाज लक्षण के आधार पर किया जाता है। बुखार, उल्टी, पेट दर्द, सिर दर्द और कमजोरी दूर करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। मरीज की नब्ज और ब्लड प्रेशर की निगरानी की जाती है। रक्त के प्लेटलेट्स काउंट दस हजार से कम होने पर पीडि़त व्यक्ति के शरीर के किसी भाग से रक्तस्राव संभव है। ऐसे में डाक्टर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह देते हैं।

पॉश इलाकों में भी खतरा : एडीज मच्छर एसी (एयर कंडीशंड) के पानी में मजे से रहता है। लिहाजा वीआइपी क्षेत्रों में भी इसके प्रति सचेत रहने की जरूरत है।

दोबारा बीमारी नहीं : किसी व्यक्ति को एक बार डेंगू हो जाए तो उसी प्रकार का डेंगू वायरस दोबारा शरीर पर असर नहीं डालता। हालांकि दूसरा वायरस नुकसान पहुंचा सकता है।

वरीय चिकित्सक डॉ. आलोक कुमार सिंह ने कहा कि डेंगू के प्रति भी लोग सावधान रहें। स्वच्छता पर ध्यान दें और मच्छर से बचकर रहें। जरा सी लापरवाही से मच्छरजनित बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसे में डेंगू से खास सतर्कता बरतने जरूरत है।

Posted By: Dilip Shukla

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