भागलपुर [जेएनएन]। शरद ऋतु की सुरमयी शाम में उम्र का भेद मिट गया। मौका था दैनिक जागरण डांडिया नाइट का। बच्चे, युवा, बूढ़े सब एक साथ भक्ति की मस्ती में झूम रहे थे। अब तक जिन्हें रूपहले पर्दे पर देखा था, आज उन सिनेस्टार के साथ डांडिया करने की बेताबी देखने लायक थी। जैसे ही प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त हुई, संगीत की मधुर धुन ने भीड़ पर डांडिया का ऐसा खुमार बरसाया कि सतरंगी लाइट और भव्य सजावट का आकर्षण जैसे शर्माने लगा। सभी मचल उठे। ढोल बाजे-ढोल बाजे कि ढमढम बाजे ढोल की धुन पर थिरक रही भीड़ का उत्साह चरम पर पहुंच गया। इसके बाद तो मशहूर अदाकारा शेफाली जरीवाला के साथ नगाड़े संग ढोल बाजे.., मैं बची रामजी की कृपा से.., कांटा लगा.. जैसे गीतों पर तो उनके साथ ताल और सुर का ऐसा संगम बैठा कि हसीन शाम कब रात में बदल गई किसी को पता ही नहीं चला।

इनकी उपस्थिति रही खास

मारवाड़ी पाठशाला में आयोजित डांडिया नाइट में मेयर सीमा साहा, एसएसपी आशीष भारती , सुधा डेयरी के एमडी हेमेंद्र कुमार, रीचा झा, दैनिक जागरण के महाप्रबंधक राजाराम तिवारी, संपादकीय प्रभारी अश्विनी कुमार, प्लानेट फैशन के निदेशक पीके घोष, दक्षिणेश्वर के निदेशक साहिल झा सहित अन्य उपस्थित थे।

जागरण डांडिया नाइट की जितनी तारीफ की जाए कम है। शैफाली सहित अन्य अदाकारा के साथ डांडिया खेलकर दिल बाग-बाग हो गया। - दीपा राज सिंह

डांडिया बैंड के साथ नृत्य करने का मजा आ गया। दैनिक जागरण सबसे लोकप्रिय अखबार है। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम हर वर्ष यहां के लोगों के लिए लेकर आता है। - शिवानी

दैनिक जागरण सिर्फ अखबार ही नहीं मित्र भी है। एक तरफ यह जहां बच्चों को संस्कार देता है तो दूसरी तरफ भक्ति जागरण से भी आनंदित करता है। - निधि बुधिया

शेफाली जरीवाला के संग डांस कर दिल खुश हो गया। यह मौका देने के लिए दैनिक जागरण का आभार। - निधि बुधिया

करवा चौथ पर्व के पावन अवसर पर जागरण ने डांडिया आयोजन कर शहर के लोगों का दिल जीत लिया। - सोनाली

ऐसे सुंदर कार्यक्रम के लिए दैनिक जागरण को बहुत बहुत आभार। शहर का सबसे अच्छा आयोजन रहा। - साक्षी

डांडिया जैसे सुंदर कार्यक्रम में जागरण ने शहरवासियों को खूब थिरकने का अवसर दिया। - प्रियंका

देर से ही सही लेकिन जागरण ने डांडिया का आयोजन कर शहर में भक्ति का समा बांध दिया। - प्राणिक

शेफाली को जागरण के डांडिया कार्यक्रम में पहली बार देखने का मौका मिला। इसके लिए जागरण अखबार को धन्यवाद। - सानू सिंह

दैनिक जागरण के डांडिया का इंतजार कर रही थी। आज इस कार्यक्रम में शेफाली संग डांस कर मन प्रसन्न हो गया। - सुप्रिया कुमारी

जागरण के डांडिया की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। शहर के लोगों को इस अखबार ने हर बार झुमाया है। - अभिलाषा

यह अखबार लोगों के लिए नृत्य संगीत का हर वर्ष कार्यक्रम लेकर आता है। यही भी कारण है कि लोग इससे सबसे ज्यादा जुड़े हैं। - संगम दीक्षित

जागरण के इस कार्यक्रम का हर कोई इंतजार करता है। आज यह इंतजार पूरा हो गया। - श्वेता भारती

जागरण डांडिया हर वर्ष लोगों को नए कलाकार से मिलने का मौका देता है। इसके लिए शुक्रिया। - आकांक्षा

दैनिक जागरण के डांडिया को शहर के लोग बेहद पसंद करते हैं। इसका कार्यक्रम संयमित होता है। - निखिल पांडेय

जागरण के डांडिया ने शेफाली के साथ लोगों को खूब झूमने का मौका दिया। इसके लिए आभार। - स्वीटी

शहर के लोगों को जागरण डांडिया खूब भाता है। दैनिक जागरण के इस कार्यक्रम का आज लोगों ने खूब आनंद लिया। - साक्षी

शेफाली के साथ-साथ अन्य कलाकारों ने भी डांडिया में खूब झुमाया। - ललित

डांडिया नाइट में लोगों का उत्साह और उमंग देखते ही बन रहा था। लोग मंच तक पहुंच कर डांस कर रहे थे। - मेघा

मस्ती भरी शाम के लिए दैनिक जागरण परिवार की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। - राजीव

जागरण डांडिया ने शहर में भक्ति की समा बांध दी। हमलोग जमकर नाचे और गाए। - अंकित

जागरण डांडिया नाइट में Mrs India international queen of hearts 2018 ऋचा झा भी हुईं शामिल। 

डांडिया नाइट में रिचा झा ने जमकर डांडिया खेला। इनके साथ शहर की महिलाएं और युवतियां भी झूमी।

शेफाली के मंच पर आते ही झूम उठे सिल्क सिटी के लोग

गुलाबी ठंड, मंद-मंद बहती हवा, खुले आसमान के नीच बना आकर्षक मंच। मस्ती भरी खूबसूरत शाम और एक से बढ़कर एक मस्ती भरी गीतों की प्रस्तुति। जब ये सभी का एक साथ संगम हों तो पैर खुद व खुद अपने आप ही थिरकने लगते हैं। मारवाड़ी पाठशाला स्कूल प्रागंण में बुधवार की शाम कुछ ऐसी ही खुशियों भरा नजारा देखने को मिला। हर जोड़े के चेहरे पर डांडिया की मस्ती और उमंग की मुस्कान साफ दिख रही थी। मौका था दैनिक जागरण की ओर से आयोजित जागरण डांडिया का।

 

शेफाली जरीवाल का जैसे ही मंच पर पदार्पण हुआ। डांडिया में शामिल खुशी से शोर मचाने लगे। फिर क्या था कांटा लगा... अपनी सुरीली, खनकती आवाज से इस शाम को और भी रंगीन बना दिया। माइक थामते ही शेफाली की गीत सुनकर युवतियां और महिलाएं अपने-आप को नहीं रोक सकीं। सभी मस्ती की धुन में सराबोर होते गए और डांडिया का जमकर लुत्फ उठाया। हर तरफ उल्लास की तरंगे हिलोरे मार रही थी। यूं कहे कि ज्यों-ज्यों गहराती शाम पर रात की रंग छाए जा रही थी, थिरकन और धड़कन परवान चढ़ता जा रहा था।

 डाडिया स्टिक के साथ सुरीले गीतों पर लोग देर रात तक जमकर झूमते रहे। माहौल कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कि पूरा शहर मारवाड़ी पाठशाला के प्रागंण में आकर बस गया हो। हजारों की भीड़ का उमंग, उफान और आनंद अपनी चरम पर थी। डांडिया में शामिल हर कोई एक सूत्र में पिरोए नजर आ रहे थे।

 

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