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चक्रवात अर्णब का बिहार में बड़ा असर! भागलपुर समेत 13 जिलों में लगातार बारिश, तापमान 4 डिग्री गिरा, 1 नवंबर तक अलर्ट

By Madhbendra KumarEdited By: Dilip Kumar Shukla
Published: Thu, 29 Oct 2026 08:49 PM (IST)

Cyclone Arnab Effect Bihar Weather: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात 'अर्णब' के प्रभाव से बिहार के 13 जिलों में ...और पढ़ें

Cyclone Arnab Effect Bihar Weather: भागलपुर में चक्रवात अर्णब के प्रभाव से छाए काले बादल और दिन में ही शुरू हुई बूंदाबांदी

Cyclone Arnab Effect Bihar Weather: भागलपुर में चक्रवात अर्णब के प्रभाव से छाए काले बादल और दिन में ही शुरू हुई बूंदाबांदी

HighLights

  1. चक्रवात अर्णब से बिहार के 13 जिलों में मौसम बदला।

  2. लगातार बारिश से तापमान 4 डिग्री तक गिरा, ठंडक बढ़ी।

  3. 1 नवंबर तक भारी बारिश, वज्रपात का अलर्ट जारी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Cyclone Arnab Effect Bihar Weather: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान 'अर्णब' (Cyclone Arnab) के प्रभाव से बिहार के कोसी, सीमांचल और अंग प्रदेश के मौसम में अचानक जबरदस्त बदलाव देखने को मिल रहा है। आसमान में बादलों की मोटी चादर ऐसी बिछी है कि दिनभर सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गए।

भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई, लखीसराय, कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा और सुपौल जिलों में लगातार हो रही फुहारों, बूंदाबांदी और ठंडी हवाओं के चलते दिन के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस मौसमी उलटफेर ने पूरे क्षेत्र की फिजा में ठंडक घोल दी है और लोगों को समय से पहले गुलाबी ठंड का अहसास करा दिया है।

खगड़िया और मधेपुरा जिलों में अधिकतम तापमान में सीधे 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जिससे लोग हल्के गर्म कपड़ों में नजर आने लगे हैं। वहीं सुपौल में दिनभर से रुक-रुक कर रिमझिम बारिश जारी है और बांका जिले में तेज बारिश का दौर शुरू हो गया है।

चक्रवात 'अर्णब' के अवशेष और नमी से बदले हालात

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवात 'अर्णब' 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यनम तट के मध्य से स्थलभाग पर प्रवेश कर गया था। तट पार करते समय यद्यपि चक्रवात की तीव्रता अत्यधिक थी, लेकिन जमीनी सतह पर आगे बढ़ने के साथ यह धीरे-धीरे कमजोर हो गया।

चक्रवात 'अर्णब' और बिहार: जिलावार स्थिति एक नजर में

  • भागलपुर: धूप नदारद, आसमान में घने काले बादल; 1 नवंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात का अलर्ट।

  • खगड़िया: लगातार बूंदाबांदी और धूप नहीं निकलने से अधिकतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की तेज गिरावट।

  • मधेपुरा: रुक-रुक कर हो रही रिमझिम बारिश; दिन के तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस तक की कमी दर्ज।

  • बांका: दोपहर बाद से कई इलाकों में तेज बरसात का दौर शुरू; मौसम में घुली ठंडक।

  • सुपौल: दिनभर जारी रही बूंदाबांदी, सर्द हवाओं से बढ़ी गुलाबी ठंड।

  • हवा की गति व अलर्ट: 29 से 31 अक्टूबर तक 30-40 किमी/घंटा रफ्तार से तेज झोंके; 31 अक्टूबर को भारी वर्षा की संभावना।

अब चक्रवात 'अर्णब' के अवशेष परिसंचरण (Remnant Circulation) और बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही भारी नमी के कारण बिहार के वायुमंडल में घने बादल बन रहे हैं, जिससे पूरे पूर्वी बिहार में लगातार वर्षा के अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।

1 नवंबर तक बारिश के आसार, 31 अक्टूबर को भारी वर्षा की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भागलपुर केंद्र द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर से लेकर 1 नवंबर तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला रहेगा। गुरुवार और शुक्रवार को आसमान में घने काले बादल छाए रहने के साथ-साथ गरज-चमक और बौछारों का दौर चलेगा। शनिवार (31 अक्टूबर) को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस दिन कुछ इलाकों में मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है।

इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवा के तेज झोंके चलने और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि तेज मेघगर्जन और बारिश के दौरान खुले मैदानों, जलजमाव वाले स्थानों और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।

खेतों में खड़ी धान की फसल पर संकट

बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के इस दौर ने अन्नदाताओं की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस समय खेतों में धान की बालियां पकने की कगार पर हैं और कई स्थानों पर फसल कटाई के करीब है।

किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

मुंगेर के वरिष्ठ कृषि विज्ञानी डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि यदि चक्रवात 'अर्णब' के असर से बारिश तेज होती है और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलती हैं, तो खेतों में खड़ी धान की फसल गिर (लॉजिंग) सकती है। इससे न केवल दाने काले पड़ेंगे, बल्कि जलजमाव होने की स्थिति में पूरी फसल सड़ सकती है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जलनिकासी के रास्तों को तुरंत खोल दें और किसी भी प्रकार के रासायनिक छिड़काव या कटाई को मौसम साफ होने तक टाल दें।

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