जागरण संवाददाता, लखीसराय। Cyber crime in Lakhsirai : Hello! मैं बीडीओ बोल रहा हूं। आपको कृषि अनुदान राशि मिली या नहीं। नहीं मिली है तो अपना बैंक खाता नंबर, आधार नंबर, पैन नंबर दीजिए उसे अपडेट करने के बाद राशि आपके खाते में चली जागएी। इस तरह के अनगिनत कॉल प्रखंड क्षेत्र के लोगों के मोबाइल पर आ रहे हैं। यदि किसी ने उक्त जानकारी साझा कर दी तो उसके खाते से राशि की निकासी कर ली जाती है। कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को बीडीओ बताता है। आश्चर्य की बात हैं कि वह जिस व्यक्ति को फोन करता हैं उसके नाम का संबोधन भी करता है। इससे लोग जालसाजी में फंस भी रहे हैं। आपके नाम कृषि यंत्र, बोरिंग और सोलर पंपसेट पास हुआ है। डेढ़ लाख रुपये अनुदान मिलेगा। यह पैसा किस बैंक खाता में भेजना हैं, कृपया खाता नंबर, पैन नंबर और आधार नंबर अपडेट करने के लिए भेजें। दूसरा कॉल हम प्रखंड कार्यालय से बीडीओ या बीएओ बोल रहे हैं। आपको कितने बार कृषि अनुदान मिला है, बताएं। इसमें अगर देर करेंगे तो अनुदान कैंसिल कर दिया जाएगा। कुछ इसी अंदाज में किसानों को साइबर अपराधी कॉल कर बैंक खाता, आधार और पैन नंबर लेकर ठगी कर रहे हैं। चानन के अजय कुमार इस ठगी के शिकार हो चुके हैं।

दरअसल किसानों को कृषि इनपुट अनुदान, यंत्र, बोरिंग और सोलर पंपसेट सहित अन्य उपकरण पर लाखों रुपये अनुदान का झांसा दिया जाता है। बताया जाता है कि कृषि विभाग ने किसानों को धान बेचने, कृषि यंत्र खरीद, खाद-बीज और सिंचाई उपकरण के लिए किसानों का ऑनलाइन पंजीयन कराया है। किसानों के ई-मेल, फोन नंबर और पता साइबर अपराधी हैक कर चुके हैं। कृषि विभाग के डाटा के आधार पर किसानों को साइबर अपराधी कॉल कर पैसे झटक ले रहे हैं। ऐसी शिकायत कृषि विभाग के पास भी पहुंच रही है। प्रखंड कृषि पदाधिकारी सुशील कुमार ने प्रखंड क्षेत्र के किसानों को ठगी गिरोह से बचने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि किसानों को ठगी का शिकार बनाने के लिए गिरोह सक्रिय है। किसानों से लगातार जानकारी मिल रही है कि उनको मोबाइल पर फोन करके बोरिंग का पैसा दिलाने, इनपुट सब्सिडी के रूप में पैसा दिलाने, फसल सहायता योजना के रूप में पैसा दिलाने के लिए मार्जिन मनी के रूप में नकद राशि देने एवं बैंक ट्रांसफर करने की बात करता है। किसान इस तरह के कॉल को गंभीरता से नहीं लें। उधर बीडीओ मनोज कुमार ने किसानों से वैसे लोगों के झांसे में नहीं पडऩे का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि किसी को इस प्रकार का कॉल आ जाए तो कृषि विभाग के जिला एवं प्रखंड कार्यालय से सीधा संपर्क करें।

Edited By: Dilip Kumar shukla