भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। मोजाहिदपुर अंचल के बबरगंज थाना क्षेत्र में 15 अप्रैल 2011 को सौ क्विंटल से अधिक चावल लदे जिस ट्रक को जब्त किया गया था उसे शातिरों ने फर्जी वाहन मालिक बनकर मुक्त करा लिया। अदालत की जमानती प्रक्रिया में इसका भंडाफोड़ हुआ है। आवश्यक वस्तु अधिनियम मामले के विशेष लोक अभियोजक प्रभात कुमार ओझा ने डीएम प्रणव कुमार से मिलकर इस फर्जीवाड़ा की जानकारी दे दी है। न्यायालय ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है।

यूं उजागर हुआ मामला

बबरगंज थाना क्षेत्र में तत्कालीन मार्केंटिंग अफसर कमल जायसवाल ने चावल लदे दो ट्रकों को जब्त किया था। इनमें से एक ट्रक को शातिरों ने मुक्त करा लिया। न्यायालय में जब इसकी सुनवाई हुई तब मामला उजागर हुआ। ट्रक (बीआर 01जीए-2817) के मालिक रहे संजय कुमार ने शपथ पत्र दाखिल कर कोर्ट को बताया है कि उसने आज तक ट्रक मुक्त ही नहीं कराया है। पुलिस द्वारा आरोपित बनाए गए संजय का कहना है कि उन्होंने तो अपना ट्रक 29 अक्टूबर 2010 में ही राकेश कुमार को बेच दिया था। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर किस शातिर ने नौ साल पूर्व जब्त ट्रक को संजय कुमार के रूप में प्रस्तुत होकर अदालत से मुक्त कराया? सोमवार को अग्रिम जमानत की अर्जी पर प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार तिवारी की अदालत में आंशिक सुनवाई हुई। विशेष लोक अभियोजक ने न्यायालय को जानकारी दी कि मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। प्रभारी जिला जज ने अग्रिम जमानत की अर्जी पर आगे की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में ही कराने बात कही है।

पांच दिन में ही बबरगंज पुलिस ने दिया एनओसी

जब्त चावल लदे ट्रक से संबंधित प्राथमिकी 15 अप्रैल 2011 को दर्ज हुई। 20 अप्रैल 2011 को संजय कुमार और अन्य ने अपने जब्त ट्रक को मुक्त करने की अर्जी दी। 25 अप्रैल 2011 को बबरगंज थाने से गाड़ी मुक्त करने संबंधित अनापत्ति अर्जी भी कोर्ट पहुंच गई। यानी पांच दिन में ही बबरगंज पुलिस ने भी एनओसी दे दिया। 26 अप्रैल 2011 को संजय कुमार एवं जब्त एक अन्य ट्रक (बीआर 08जी 8256) के मालिक अरुण कुमार ने कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया कि दोनों ट्रकों के चालक क्रमश: प्रप्पू मंडल और भरत मंडल हैं। उसी दिन कोर्ट ने दस-दस लाख रुपये की दो प्रतिभूतियों पर जब्त ट्रक को मुक्त करने का आदेश दे दिया। 27 अप्रैल 2011 को दोनों ट्रक ऑनर ने बांड दाखिल कर मुक्ति आदेश जारी करवाया।

परत-दर-परत ऐसे खुला फर्जीवाड़ा

बबरगंज पुलिस जब 16 सितंबर 2016 को मामले की तफ्तीश कर केस डायरी लिखने लगी तब ट्रक मालिक की ओर से शपथ पत्र में दर्शाए चालकों के पते की जानकारी ली। वहां जांचकर्ता पहुंचे तो पता चला दोनों गाड़ी चलाते ही नहीं हैं। पुलिस ने केस डायरी में इसका हवाला देते हुए लिखा कि दोनों के संबंध में कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में तथ्य गलत है। तब जांचकर्ता पुलिस पदाधिकारी ने ट्रक मालिक संजय कुमार, अरुण कुमार, दोनों चालकों और जब्त चावल लदे ट्रक से मिली कैश मेमो में अंकित चंद्रशेखर कुमार को भी आरोपित बना दिया। आरोपितों के विरुद्ध वारंट-कुर्की जब्ती आदेश जारी हो गया। तब नौ साल बाद आरोपित बनने की जानकारी पर ट्रक ऑनर रहे संजय कुमार ने कोर्ट में 13 सितंबर 2019 को अग्रिम जमानत अर्जी दी। उसमें शपथ पत्र देकर कोर्ट को बताया कि उसने कभी गाड़ी मुक्त ही नहीं कराया है। उसने तो अपनी गाड़ी 2010 में ही राकेश कुमार को बेच दी थी। अब बड़ा सवाल कि आखिर किसने जब्त ट्रक को मुक्त करा लिया? कहां गया जब्त ट्रक और चावल?

Posted By: Dilip Shukla

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