भागलपुर। कृषि, बिजली, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य लेकर सभी क्षेत्रों में काम हो रहा है। धरातल पर काम दिख रहा है। बिहार ने अलग पहचान बनाई है। सात निश्चय का काम सभी जिलों में पूरा होने के बाद राज्य की अलग पहचान बनेगी। गांव में भी सभी मूलभूत सुविधा दिखने लगेगी। यह बात बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में जदयू के प्रवक्ता सह महासचिव प्रगति मेहता ने कही।

उन्होंने कहा कि बिहार में 1990 से 2005 तक राजद की सरकार थी। इस अवधि में अपराध चरम पर था। जबकि इनकी तुलना में 2006 से लेकर 2018 के अबतक अपराध का ग्राफ काफी गिरा है। हत्या मामले में करीब 26 फीसद, डकैती में 71.99 फीसद, अपहरण में 77.78 फीसद कमी आई है। उस दौर में जहां बिहार में 118 नरसंहार हुए वहीं अब इस पर पूरी तरह से विराम लग गया है। विपक्षी पार्टियां सरकार को बदनाम कर रही है। लेकिन एक बिहारी होने के नाते ऐसा नहीं करना चाहिए। आज सभी जिलों में 20 से 22 घंटे बिजली रहती है। जबकि एक समय था कि गांव की बात तो दूर शहर में कई दिनों तक बिजली के दर्शन नहीं होते थे। लोकशिकायत निवारण अधिकार कानून सहित कई ऐसे मामले है जिसमें राज्य की पहचान देश भर में बनी है। शराबबंदी के बाद अमन-चैन की जिंदगी लोग जी रहे हैं। घरों में शांति आई है और घटनाएं कम हुई है। सीएम ने महिलाओं को सभी तरह की नौकरियों में 35 फीसद आरक्षण देकर बेहतर नजीर पेश की है।

इस मौके पर जिलाध्यक्ष डॉ. विभूति गोस्वामी, महानगर अध्यक्ष राजदीप राजा, जिला प्रवक्ता मिथिलेश कुमार, महानगर प्रवक्ता पंकज अग्रवाल, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर मिश्रा, शेखर पांडे, युवा नेता रोहित यादव, संतोष कुमार, मनोज मिश्रा और राकेश यादव सहित कई कार्यकर्ता थे।

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