भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र] : सुंदरवन में विलुप्तप्राय गरुड़ के लिए खोले गए पुनर्वास केंद्र पर बगुलों के झुंड ने कब्जा जमा लिया है। वहां रखे गए चार बीमार गरुड़ों के भोजन के लिए रोज तीन किलोग्राम छोटी-बड़ी मछलियां मंगाई जाती है। उसमें से एक तिहाई मछलियां बगुले झपट ले रहे हैं।

झुंड में एक दर्जन के करीब बगुले हैं। पुनर्वास केंद्र में मौजूद बीमार गरुड़ की देखरेख में लगे वनकर्मी मछली देकर जैसे ही जाते हैं, बगुलों का झुंड सक्रिय हो जाता है। बड़े चोंच की वजह से गरुड़ तेजी से मछली चट करने की कोशिश करते हैं लेकिन बीमार के चलते शरीर साथ नहीं देता। चार गरुड़ में एक जो कुछ स्वस्थ्य हो चुका है वह बगुलों को भगाने का प्रयास करता है लेकिन उसका प्रयास भी अधूरा ही साबित होता है। बाड़े के अंदर बांस की छोटी झोपड़ी बनाई गई है। जहां गरुड़ों को रहने की व्यवस्था है लेकिन ये खुले बाड़े में ही विचरण करते हैं।

भोजन देने के बाद वनकर्मी पुनर्वास केंद्र की ओर यदा-कदा ही रुख करते हैं। पुनर्वास केंद्र में बगुलों के प्रवेश करने वाली जगहों को बंद करने का कोई प्रयास नहीं हुआ है। बगुलों के झुंड का गरुड़ पुनर्वास केंद्र पर एक सप्ताह से कब्जा है लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं। पक्षी विज्ञानी भी सुदूर दियारा क्षेत्र में भ्रमण करने, दुर्लभ पक्षियों की खोज करने का बखान सोशल साइट पर करना नहीं भूलते लेकिन बीमार गरुड़ के भोजन पर रोज बगुलों के झुंड का डाका हो रहा है यह जानने नहीं पहुंचते। गरुड़ का भोजन झपटने वाले बगुले में अधिकतर मटमैले रंग वाले बगुले हैं। सफेद वाले बगुले की संख्या दो है जो गरुड़ पुनर्वास केंद्र में बने छोटे तालाब में छोड़ी गई नन्हीं मछलियों को ही खाते हैं।

जिला वन पदाधिकारी एस. सुधाकर कहते हैं कि गरुड़ को छोटे पक्षियों यहां तक बगुले से कोई खतरा नहीं है। पुनर्वास केंद्र में मौजूद बांस से बने छोटे आवास में उन्हें भोजन दिया जाता है। पुनर्वास केंद्र के टूटे बाड़े को ठीक करा दिया जाएगा।

Posted By: Jagran

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