जागरण संवाददाता, भागलपुर : एकचारी रसलपुर के एक व्यक्ति से 50 हजार रुपये लेकर फर्जी लाइसेंस दे दिया गया। यह मामला तब उजागर हुआ, जब वह व्यक्ति लाइसेंस के आधार पर पाश मशीन लेने के जिला कृषि कार्यालय पहुंचा। लाइसेंस देखने के बाद जिला कृषि पदाधिकारी कृष्णकांत झा ने उसे फर्जी करार देते हुए लाइसेंस जारी करने वाले मुंदीचक के एक युवक के खिलाफ तिलकामांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

दरअसल, आलोक प्रकाश के नाम से एकचारी रसलपुर के अभिमन्यु सिंह मापतौल विभाग से तराजू का लाइसेंस बनवाने आया थे। यहां उनकी मुलाकात नकुल चंद्र लेन निवासी कंप्यूटर आपरेटर आलोक प्रकाश से हुई। बेल्ट्रान से नियुक्त कंप्यूटर आपरेटर का काम छोड़कर चले जाने के कारण मापतौल विभाग द्वारा आलोक से कंप्यूटर आपरेटर का काम लिया जा रहा था। उसने अभिमन्यु सिंह को खाद, बीज व पेस्ट्रीसाइड का लाइसेंस बनवा देने का भरोसा दिलाया। इसके एवज में 25 हजार रुपये की मांग की गई। साथ ही खाद दिलाने के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग की गई। तराजू के लाइसेंस के लिए चार हजार रुपये लिए।

अभिमन्यु सिंह ने दो बार में 25-25 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। 17 नवंबर को अंतिम भुगतान 25 हजार रुपये किया गया। राशि लेने के बाद आलोक प्रकाश ने खाद, बीज व कीटनाशक तीनों का एक ही लाइसेंस अभिमन्यु सिंह को दे दिया। लाइसेंस पर जिला कृषि पदाधिकारी का फर्जी हस्ताक्षर भी कर दिया। खाद के लिए ट्रक के कभी घोघा तो कभी एकचारी में फंसे रहने की बात कहकर टालता रहा।

अभिमन्यु सिंह आलोक प्रकाश द्वारा दिए गए लाइसेंस के आधार पर पाश लेने बुधवार को जिला कृषि कार्यालय पहुंचा। लाइसेंस की कापी की जब कार्यालय कर्मियों द्वारा जांच की गई तो पता चला कि खाद, बीज, कीटनाशक से संबंधित लाइसेंस फर्जी है। जब अभिमन्यु सिंह से जिला कृषि पदाधिकारी ने पूछताछ की तो उसने सारी जानकारी दे दी। इसके बाद जिला कृषि पदाधिकारी ने तिलकामांझी थाने में आवेदन देकर आलोक प्रकाश के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया है।

कार्यालय में बैठकर करता था दलाली

मापतौल विभाग में वेल्ट्रान से नियुक्त डाटा कंप्यूटर आपरेटर के छोड़कर चले जाने के बाद मुंदीचक के आलोक प्रकाश से कंप्यूटर आपरेटर का काम लिया जा रहा था। इसकी लिखित जानकारी मापतौल विभाग के कर्मचारी ने जिला कृषि पदाधिकारी को दी है। एक माह पहले वेल्ट्रान से समीर के रूप में डाटा आपरेटर मापतौल विभाग को मिल गया है। इसके बाद आलोक प्रकाश से विभाग द्वारा काम लेना बंद कर दिया गया है। आलोक प्रकाश द्वारा अभी तक कितने फर्जी लाइसेंस निर्गत किए गए हैं, इसका पता लगाया जा रहा है।

खाद और बीज के लिए अलग-अलग बनता है लाइसेंस

खाद, बीज, कीटनाशक बेचने के लिए लाइसेंस के लिए कृषि विभाग में आनलाइन आवेदन लिया जाता है और आनलाइन ही लाइसेंस निर्गत किया जाता है। लाइसेंस पर जिला कृषि पदाधिकारी का डिजिटल हस्ताक्षर होता है। खाद के लिए अलग और बीज के लिए अलग लाइसेंस बनता है। कीटनाशक बेचने के लिए भी अलग लाइसेंस बनता है, लेकिन मापतौल विभाग के आपरेटर ने एक ही लाइसेंस खाद, बीज व कीटनाशक का निर्गत कर दिया।

डिग्री वाले को मिलता है लाइसेंस

खाद, बीज व कीटनाशक के लाइसेंस के लिए बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी केमेस्ट्री या फिर आत्मा या बिहार कृषि विश्वविद्यालय से 15 दिवसीय दिवसीय पोषक तत्व प्रबंधन का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता है। लाइसेंस के लिए आनलाइन आवेदन के साथ आनलाइन चालान व कागजात जमा करना होता है। सारी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद आवेदन जिला कृषि पदाधिकारी के पास आता है। यहां से कार्यालय के बड़ा बाबू, नामित एक अधिकारी, बीओ से सत्यापित होते हुए आवेदन फिर जिला कृषि पदाधिकारी के पास पहुंचता है। सबकुछ सही रहने पर लाइसेंस निर्गत किया जाता है।

'एकचारी रसलपुर के अभिमन्यु सिंह पाश मशीन लेने कार्यालय आया था। शक होने पर जांच की गई। उसका लाइसेंस फर्जी निकला। फर्जी लाइसेंस निर्गत करने वाले आलोक प्रकाश के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तिलकामांझी थाने में आवेदन दिया गया है।'- कृष्णकांत झा, जिला कृषि पदाधिकारी

Edited By: Shivam Bajpai