भागलपुर [कौशल किशोर मिश्र]। अभी हमरा की होलै छै, अभी बहुते दिन जिबै...(हमें अभी क्या हुआ है, अभी बहुत दिन जीना है)। आत्मविश्वास से भरी सौ साल की वृद्ध महिला मोहिनी देवी लंबी उमर का राज बताने लगती हैं। 

इम्युनिटी क्या बला है, इन्हें नहीं पता। ये तो बस इतना जानती हैं कि सरसों तेल हो या मड़ुअे की रोटी, शरीर तंदुरुस्त रहता है। फिर कौन सी बीमारी छू लेगी। बड़े गर्व से कहती हैं-दिन भर में छत की सीढिय़ां चढ़ती-उतरती हूं। कपड़े भी धोती हूं। पेंशन लेने पोस्टऑफिस भी खुद ही चली जाती हूं। वे कहती हैं, पुरखे बहुत कुछ बता कर गए हैं, उसका उपयोग कीजिए।

क्या करते थे तब? वे हंसते हुए कहती हैं- तब के जमाने में कोल्हू के कडुआ तेल (सरसों तेल) से बच्चे की जमकर मालिश करते थे। दिन में तीन बार। ताल मिसरी का पानी, बच्चा बड़ा होता था तो हल्दी मिला दूध, ताकि वह अंदर से मजबूत हो। रोग-व्याधि से दूर रखने के लिए बरियार की जड़, बड़हर के पेड़ की छाल, तुलसी, गोलमिर्च, अदरक, हर्रे को पीस कर गुड़ के साथ खिलाते थे। हमलोग भी खाते थे। बीमारी नहीं फटकती थी। अब तो नया जमाना है न। कोरोना कोरोना सुन रहे हैं। खुद को मजबूत रखें, कोई बीमारी नहीं फटकेगी। करीब सौ साल के हो चुके सियाशरण भी कहते हैं कि पहले गाय का दूध, हल्दी और तुलसी पत्ता मिलाकर पी लेने मात्र से शरीर की इम्युनिटी बढ़ जाती थी। तुलसी, अदरख, गोलमिर्च का काढ़ा भी रोज पीते थे। हम आज भी खुद भोजन तैयार करते हैं। बिना सहारा के घूमते हैं। उनकी बातों पर फिजिशियन डॉ. नीरज सर्राफ भी मुहर लगाते हुए कहते हैं कि बरियार और बड़हर के पेड़ की जड़ या छाल, गोलमिर्च, अदरख, तुलसी और हल्दी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर हैं। आयुर्वेद चिकित्सक अनिल कुमार शर्मा कहते हैं कि ये चीजें शरीर की इम्युनिटी बढ़ा देती हैं। इसका सेवन लाभकारी है।

Posted By: Dilip Shukla

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