उपेंद्र, संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया)। कोरोना की दूसरी तुफानी लहर से नगर परिषद खगड़िया और परबत्ता प्रखंड सर्वाधिक प्रभावित रहा। यह दोनों डेंजर जोन रहे। एक नगर पंचायत और 19 पंचायतों वाली परबत्ता प्रखंड की आबादी लगभग तीन लाख है। दूसरी लहर में यहां आठ सौ के आसपास लोग कोरोना पाजिटिव हुए। सरकारी आंकड़े में सात लोगों की मौतें हुई। फिलहाल, एक भी पाजिटिव नहीं है। जबकि तीन लाख की आबादी में अब तक मात्र 45 हजार लोगों की ही कोरोना जांच हुई है।

कहने का मतलब टेस्टिंग में परबत्ता फिसड्डी है। ऐसे में संभावित तीसरी लहर से कैसे मुकाबला होगा यह कहना मुश्किल है। परबत्ता सीएचसी साधन-सुविधा के मामले में भी भगवान भरोसे है।

एक नजर में परबत्ता सीएचसी

  • -स्थापना वर्ष 1953 ई। पहले छह बेड का अब 30 बेड का अस्पताल है।
  • -स्थापना वर्ष से अब तक सीएचसी में महिला डाक्टर की पद स्थापना नहीं हुई है।
  • -चिकित्सकों के 10 स्वीकृत पद के विरुद्ध मात्र पांच पदस्थापित। जिसमें एक योगदान के बाद पढ़ाई के लिए चले गए हैं।
  • -फार्मासिस्ट मात्र एक, जरूरत चार की।
  • -ड्रेसर एक भी नहीं।
  • - यहां पांच जीएनएम और दो बी ग्रेड एएनएम हैं।
  • -चार के बदले मात्र एक कंपाउंडर है।
  • - एंबुलेंस दो है।
  • -पांच के बदले मात्र एक लैब तकनीशियन है।

आपरेटर के अभाव में वेंटिलेटर बंद

सीएचसी परबत्ता को स्थानीय विधायक डा. संजीव कुमार के प्रयास से बीते वर्ष एक वेंटिलेटर मिला था। परंतु, वह आपरेटर के अभाव में बंद है। फिलहाल 10 आक्सीजन सिलेंडर है। आक्सीजन कंसंट्रेटर की संख्या पांच है।

'10 आक्सीजन सिलेंडर के साथ-साथ पांच आक्सीजन कंसंट्रेटर मौजूद है। दवा भी पर्याप्त है। कर्मियों की कमी को ले उच्चाधिकारी से लेकर मंत्री तक का ध्यान आकृष्ट कराया है। प्रत्येक दिन कोरोना जांच होती है। अभी कोरोना पर नियंत्रण है।'- डा. पटवर्धन झा, प्रभारी, परबत्ता सीएचसी।

वादे और दावे तमाम हैं लेकिन इतने कम संसाधन से कैसे कोरोना की तीसरी लहर पर काबू पाया जा सकेगा, ये सवाल बड़ा हो जाता है। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अधिकारी हर रोज दम भरते नजर आते हैं। बहरहाल, अभी समय है कि इसे दुरुस्त किया जाए।

Edited By: Shivam Bajpai