भागलपुर। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के आइसीयू में भर्ती कोरोना मरीज बेहोशी के डॉक्टर (एनेस्थेसिया) के भरोसे हैं। लगातार मरीजों की मौत हो रही, इसके बाद भी इलाज में मेडिसीन या विशेषज्ञ चिकित्सक का नहीं होना बड़ा सवाल खड़ा करता है।

आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में 12 एनेस्थेसिया चिकित्सकों को लगाया गया है। सभी नियमित रूप से ड्यूटी कर रहे हैं। वहीं, दूसरे चिकित्सकों के लिए रोस्टर बनाया गया है, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सक ऑन कॉल पहुंचते हैं। मरीजों की मानें तो आइसीयू के मेडिकल ऑफिसर भी झांकने नहीं आते। आइसीयू में भर्ती ज्यादातर मरीजों में सांस की परेशानी होती है। ऐसे में सांस और हृदय रोग वाले चिकित्सकों का यहां होना जरूरी है। एनेस्थेसिया के चिकित्सक सिर्फ ऑक्सीजन और वेंटिलेटर ही ऑपरेट कर सकते हैं। वहीं, दवाइयां और इलाज की जानकारी इन्हें विशेषज्ञों की तरह नहीं है। ऐसे में अगर मरीजों की तबीयत बिगड़ जाती है तो कुछ भी हो सकता है।

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इमरजेंसी में ऑन कॉल की व्यवस्था

अभी आइसीयू में विशेषज्ञ और सीनियर डॉक्टर तो रहते नहीं है, ऐसे में कोरोना मरीजों की तबियत बिगड़ती है तो इन्हें कॉल करके बुलाया जाता है। अस्पताल प्रशासन की ओर से यह व्यवस्था की गई है। इस कारण वरीय और विशेषज्ञ इमरजेंसी में ही आते हैं।

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केस कम था तो सभी थे तैनात

भागलपुर में कोरोना का मामला कम था तो सभी विशेषज्ञ और सीनियर भी तैनात थे। मामला बढ़ते ही सभी ने अपने आप को ड्यूटी से अलग कर लिया। वहीं, टीटीसी कोविड सेंटर में आयुष चिकित्सकों को लगाया गया है। यहां एक भी एमबीबीएस चिकित्सक की ड्यूटी नहीं लगी है। पर्याप्त चिकित्सकों की ड्यूटी नहीं लगने की वजह से सरकार की फजीहत हो रही है। चिकित्सकों की कमी की वजह से कोरोना मरीजों का इलाज ढंग से नहीं हो पा रहा है।

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चिकित्सकों में पनप रहा आक्रोश

स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के अनुसार कोरोना मरीजों को रोज एजिथ्रोमाइसिन का एक टेबलेट, विटामिन सी की दो गोली, विटामिन बी का एक कैप्सूल, 100 डिग्री फारेनहाइट से ज्यादा बुखार होने पर पेरासिटामोल का एक टेबलेट और ओआरएस का घोल कोरोना मरीजों को देना है। इसके लिए कोई भी चिकित्सक तैनात किया जा सकता है, लेकिन जेएलएनएमसीएच के आइसीयू में सिर्फ एनेस्थीसिया के चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है।

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कोट

-प्रोटोकॉल के तहत एनेस्थेसिया चिकित्सक को आइसीयू में लगाया गया है। इसके अलावा विशेषज्ञ और सीनियर ऑन कॉल पहुंचते हैं। रोस्टर के हिसाब से ही सभी की ड्यूटी लगी है।

-डॉ. अशोक भगत, अधीक्षक, जेएलएनएमसीएच।

Posted By: Jagran

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