भागलपुर, जेएनएन। कांग्रेस पार्टी : भागलपुर विधान सभा के केवल भागलपुर सीट से ही कोंग्रेस पार्टी के उमीदवार चुनाव जीते हैं। जबकि कहलगांव ओर सुल्तानगंज सीट से उम्मीदवार चुनाव हार गए हैं। हार की समीक्षा की जाएगी और समीक्षा के आधार पर प्रखंड अध्यक्ष को बदलाा भी जा सकता है।

 हार का कारण राजद भी 

पार्टी के जिलाध्यक्ष परवेज जमाल ने कहा कि हार का कारण  राजद भी है। जिस सीट पर पार्टी मजबूत थी, उस सीट पर पार्टी को टिकट नही दिया गया। इसकी समीक्षा राज्य स्तर पर पार्टी के आलाकमान करेंगे। जहां कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव मेें खड़े थे वहां राजद कार्यकर्ताओं ने भी तन मन से पार्टी प्रत्याशीीको मदद नहीं किया। जबकि कांग्रेस के कार्यक्रर्ताओं ने पूरी ताकत के साथ गंठबंधन धर्म का निर्वहन किया।  

सबसे बुरी हार कहलगाँव विधान सभा सीट पर हुई। इस सीट से दिग्गज कोंग्रेसी सदानंद सिंह के पुत्र सुभानंद मुकेश को टिकट दिया गया था। नौ बार चुनाव जीतने वाले सदानंद सिंह भी अपने पुत्र की सीट नहीं बचा पाए। 40 हजार से ज्यादा मतों से सुभानंद पराजित हो गए। पार्टी के जिला अध्यक्ष परवेज जमाल ने कहा कहलगाँव सीट से हारना काफी नुकसानदेह होगा। इसकी गहन समीक्षा की जाएगी। जरूरत होगी तो प्रखंड अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं। अभी विधायक बाहर हैं, उनके आने की प्रतीक्षा की जा रही है।

उन्होने पार्टी के नगर विधायक अजीत शर्मा की दोबारा जीत यहां के कार्यकर्ताओं की जीत है। श्री शर्मा को कांग्रेस विधायक दल का नेता चुने जाने पर उन्होने प्रसन्नता व्यक्त की। जिलाध्यक्ष ने कहा कि नगर विधायक को विधायक दल का नेता चुने जाने पर भागलपुर में कार्यकर्ताओं का मान सम्मान बढ़ा है। नगर विधायक के नेतृत्व में प्रदेश भर में पार्टी को मजबूती मिलेगी। प्रदेश में कांग्रेस की जड़ मजबूत करने के लिए जल्द नई कार्य योजना तैयार किया जाएगा। विधायक दल के नेता सभी जिलाध्यक्षकों के साथ जल्द बैठक करेंगे। भागलपुर सीट जीतने से कांग्रसियों में उत्‍साह है। यहां बता दें कि भागलपुर के कांग्रेस प्रत्‍याशी विधायक अजीत शर्मा ने भाजपा के रोहित पांडेय को एक हजार मतों के अंतर से हराया था। रोहित पांडेय भाजपा के भागलपुर जिलाध्‍यक्ष हैं और पहली बार वे भागलपुर विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे। अजीत शर्मा की जीत के बाद वे यहां से लगतार तीसरी बार विधायक बने। अजीत शर्मा 2014 से यहां के विधायक हैं।