भागलपुर में गंगा का पानी घटते ही बंद होने लगे सामुदायिक किचन, रसोई बंद होने से भूखे सोने को मजबूर लोग
गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद भागलपुर के बाढ़ प्रभावित गांवों में मुश्किलें बरकरार हैं, जहां कई इलाकों में अब भी पानी जमा है।

भागलपुर में गंगा का जलस्तर घटते ही बंद होने लगे सामुदायिक किचन (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
गंगा का जलस्तर घटने पर सामुदायिक किचन बंद हो रहे हैं।
बाढ़ प्रभावित गांवों में भोजन-पानी का संकट गहराया है।
कई घरों में अब भी पानी और कीचड़ जमा है।
जागरण टीम, भागलपुर। गंगा का जलस्तर भले ही धीरे-धीरे नीचे उतर रहा हो, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कई इलाकों में अब भी घरों और रास्तों पर पानी जमा है। ऐसे में बाढ़ पीड़ितों के सामने भोजन और पीने के पानी की समस्या बनी हुई है। इसी बीच कई प्रखंडों में सामुदायिक किचन बंद किए जाने से प्रभावित परिवारों की परेशानी बढ़ गई है।
जिन परिवारों के घरों में पानी घुसा है और चूल्हा तक नहीं जल पा रहा, उनके सामने अब दो वक्त के भोजन का संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ प्रभावित सोनी देवी, जागो चौधरी का कहना है कि प्रशासन को केवल जलस्तर घटने के आधार पर किचन बंद करने के बजाय गांवों में वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए।
कई जगह घरों में पानी और कीचड़ है, रास्ते बाधित हैं और लोगों का राशन भी बर्बाद हो चुका है। ऐसे परिवारों के लिए पानी पूरी तरह निकलने और जनजीवन सामान्य होने तक सामुदायिक रसोई राहत का बड़ा सहारा बनी हुई है।
बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं निकला
अजगैवीनाथ धाम क्षेत्र में महेशी पंचायत सहित कई इलाकों में बाढ़ का पानी पूरी तरह नहीं निकला है। महेशी पंचायत के वार्ड संख्या 11 निवासी राजीव कुमार ने बताया कि उनके घर में अभी भी पानी है। घर का सामान क्षतिग्रस्त हो चुका है। राशन और खाना बनाने की व्यवस्था नहीं है।
प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे सामुदायिक किचन से दो वक्त का भोजन मिल रहा था, लेकिन उसके बंद होने से अब परिवार के सामने गंभीर परेशानी खड़ी हो गई है। उन्होंने कहा कि पानी उतरने तक सामुदायिक किचन चलाया जाना चाहिए।
अंचल अधिकारी रमन कुमार ने बताया कि बाढ़ का पानी उतरने और स्थिति में सुधार को देखते हुए कुछ सामुदायिक किचन बंद किए गए हैं। अधिक प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी रसोई संचालित की जा रही है। निरीक्षण के बाद प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में 37 सामुदायिक किचन बंद किए गए हैं, जबकि तीन पंचायतों में सात किचन अभी भी चालू हैं।
गोराडीह में 21 किचन बंद
अंचल अधिकारी कुमार शिवम के अनुसार जिन क्षेत्रों से पानी निकल गया है और जनजीवन सामान्य हो रहा है, वहां सामुदायिक किचन बंद किए गए हैं। प्रखंड में पहले 28 किचन संचालित थे। अब नदीयामा पंचायत के जोगिया में दो, मोहनपुर पंचायत के मोहन में तीन और सालपुर पंचायत के सालपुर में एक किचन चल रहा है। माछीपुर, अगरपुर, उस्तु और जीछो पंचायत में कुल 21 किचन बंद किए गए हैं।
कहलगांव में 25 रसोई बंद
कहलगांव प्रखंड में 47 स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित थी। सोमवार से इनमें 25 स्थानों की रसोई बंद कर दी गई। अंचल अधिकारी श्रीनिवास कुमार ने इसकी जानकारी दी।
शाहकुंड में छह बंद, 16 जारी
शाहकुंड में कुल 22 सामुदायिक किचन चल रहे थे। इनमें छह बंद कर दिए गए हैं, जबकि 16 अभी भी संचालित हैं। सीओ के अनुसार बेलथू पंचायत में चार और खैरा पंचायत में दो किचन बंद किए गए हैं।
नाथनगर में भी बंद होने लगे किचन
नाथनगर प्रखंड में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर सामुदायिक किचन चल रहे थे। इनमें एक किचन बंद किया जा चुका है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति की समीक्षा के बाद अन्य किचनों को भी बंद किया जा सकता है।
पीरपैंती और रंगरा में राहत जारी
पीरपैंती में 33 स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित हो रही है और अभी एक भी बंद नहीं की गई है। वहीं रंगरा प्रखंड में 15 सामुदायिक किचन चल रहे हैं। प्रभारी अंचलाधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि एक भी किचन बंद नहीं हुआ है। रंगरा, मदरौनी, सधुआ, कोशकीपुर, सहौड़ा, तीनटंगा दक्षिण और तीनटंगा उत्तरी पंचायतों में इन रसोइयों के माध्यम से बाढ़ प्रभावित और जरूरतमंद लोगों को भोजन दिया जा रहा है।
