भागलपुर [जेएनएन]। खंजरपुर दुर्गा मंदिर के पास इस बार मध्यप्रदेश के चतुर्भुज मंदिर के स्वरूप का पूजा पंडाल बनेगा। मां दुर्गा उसी पंडाल में विराजेंगी। पंडाल को स्वरूप देने के लिए मालदा के बखतल्ली से कलाकार बुलाए गए हैं। ये कलाकार मु. राजू शेख के मार्गदर्शन में पंडाल को चतुर्भुज मंदिर का स्वरूप देने में लगे हैं।

मेले के आकर्षण का केंद्र है यहां का पंडाल

हर साल यहां का बनने वाला पंडाल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। पूजा समिति के सचिव राकेश कुमार उर्फ बबलू बाबू ने बताया कि यहां बीते 77 वर्षों से देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होते आ रही है। यहां देवी दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को कोई कठिनाई नहीं होगी। मंदिर प्रागंण तक पहुंचने वाले हर रास्ते पर प्रयाप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है।

असामाजिक तत्वों पर तीसरी आंख की होगी नजर

पंडाल के अंदर और बाहर आधा दर्जन सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा वांलेंटियर एवं पुलिस बल की भी तैनाती रहेगी।

बलि प्रथा का है पुराना इतिहास

पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि मंदिर की स्थापना 1942 में हुई थी। तब से यहां बलि प्रथा की शुरूआत हुई थी, लेकिन 1985 में यहां बलि प्रथा को बंद करा दिया था। पुन: 2014 में बलि प्रथा शुरू की गई। यहां नवमीं पूजा को बलि दी जाती है और रात में बलि का प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच वितरण किया जाता है।

नौवीं दसवीं को पुलाव सब्जी का भोग

नवमी और दसवीं पूजा को देवी को पुलाव, पूड़ी, सब्जी, हलुवा, खीर और बुंदिया का भी भोग लगाया जाता है। बड़ी संख्या में भक्तगण महाप्रसाद को ग्रहण करने के लिए मंदिर प्रागंण में आते हैं।

भक्ति जागरण का होता है आयोजन

श्रद्धालु के मनोरंजन के लिए प्रतिवर्ष महाअष्टमी की रात्रि में भक्ति जागरण का आयोजन होता है। इस कार्यक्रम का बड़ी संख्या में भक्तगण अपने परिवार के साथ देवी गीतों एवं भजनों का आनंद लेते हैं।

पूजा को सफल बनाने में इनका रहता है योगदान

अध्यक्ष संजीव सिंह, सचिव राकेश कुमार उर्फ बबलू बाबू, उपाध्यक्ष पवन यादव, कोषाध्यक्ष अजीत यादव और कार्यकारिणी सदस्य अनुज, गौतम, मिथुन, विशाल, रविंद्र, अमित, सिंटू, चंदन, मयंक, लालू, राहुल, रोहित सहित अन्य

Posted By: Dilip Shukla

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