भागलपुर [जेएनएन]। सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के प्रशासक रिपोर्ट के साथ दिल्ली रवाना हो गए हैं। वे दिल्ली में सीबीआइ मुख्यालय में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। सीबीआइ ने जिला सहकारिता विभाग के सहायक निबंधक से ऑडिट रिपोर्ट व पूर्व में सृजन के कराए गए ऑडिट का फीस और फीस निर्धारण को लेकर सर्कुलर की मांग की थी। सीबीआइ ने 10 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने को कहा है।

9000 तक पहुंची खाते की संख्या : सृजन के खाते की संख्या नौ हजार तक पहुंच गई है। पहले इसकी संख्या छह हजार तक ही बताई जा रही थी। अभी तक कंप्यूटर में पांच हजार खाते की इंट्री हो चुकी है, जबकि लगभग चार हजार खाते की इंट्री बांकी है। पहले यह पता चला था कि सृजन ने अपने यहां विभिन्न लोगों व समूहों आदि के करीब 6000 खाते खोले थे, जो इंट्री होने के दौरान पता चला कि करीब 9000 हैं। इन खातों की डाटा इंट्री इसलिए की जा रही है कि सीबीआइ ने खाते की विवरणी इंवेस्टमेंट के साथ मांगी है।

कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट : सृजन के कार्यों की देखरेख के लिए सहकारिता विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी का कहना है कि जिस पंजी में चि_ी-पत्री का पंजी हो रहा है, उसमें त्रुटि है। फूड सामग्री और कपड़ा खराब हो रहा है।

बुडको ने मनी सूट सेपहले की अधिवक्ता की मांग

बुडको की ओर से बैंक ऑफ बड़ौदा से राशि की वसूली के लिए कोर्ट में मनी सूट दायर करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए बुडको की ओर से नगर विकास व आवास विभाग से मनी सूट दायर करने को लेकर आने वाले खर्च के लिए 55 हजार रुपये की मांग की गई थी। साथ ही मनी सूट दायर करने के लिए विभाग से अनुमति भी मांगी गई थी। मनी सूट दायर करने के लिए विभाग से राशि और अनुमति दोनों ही मिल गई है। राशि और अनुमति मिल जाने के बाद बुडको के अधिकारी वकीलों से कानूनी सलाह लेने के लिए संबंधित फाइल को भेजा था। लेकिन अधिवक्ताओं ने कागजात में त्रुटि रहने का हवाला देकर फाइल को लौटा दिया है। त्रुटि दूर कर फिर से फाइल की मांग की गई है। इधर, बुडको के कार्यपालक अभियंता ने विभाग से एक अधिवक्ता की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अगर मुझे मनी सूट दायर करना है तो एक अधिवक्ता दिया जाए। बुडको को कानूनी सलाह मिल जाने के बाद सरकारी अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा के खिलाफ मनी सूट दायर करेगा।

सृजन घोटाले में बुडको (पूर्व में डूडा) के खाते से 16 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआइ जांच चल रही है। सीबीआइ जांच में कैशबुक में त्रुटि पकड़ी गई थी। त्रुटि का संधारण और अंतरशेष में बड़ा अंतर पाया गया था। कैशबुक में इंट्री के मुताबिक प्रमाणित करने वाले दस्तावेज को नहीं लगाया गया। सुधारों को प्रमाणित नहीं किया गया। ब्याज व बैंक प्रभारों को कैशबुक में नहीं लिखा गया। खनिज विभाग को रॉयल्टी भी नहीं जमा किया गया। इसमें पूर्व क्लर्क और इंजीनियर की संलिप्तता पाई गई है।

मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना के लिए आवंटित राशि 4.01 करोड़ बैंक ने जमा नहीं किए। एक बैंक से दूसरे में आंतरिक राशि जमा नहीं किया जाने का भी मामला है। करीब 9.88 करोड़ रुपये जमा करना था। धोखाधड़ी के कारण देरी से योजना की राशि बैंक ने जमा किया। इसमें 1.90 करोड़ मूल और 2.6 लाख ब्याज का नुकसान हुआ। अनजाने स्रोत से 10.25 करोड़ रुपये जमा किए गए।

Posted By: Dilip Shukla

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