संवाद सूत्र, कहलगांव (भागलपुर)। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सदानंद सिंह से गहरा लगाव था। सदानंद बाबू के कहलगांव स्थित आवास पर मुख्यमंत्री दूसरी बार आए थे। सदानंद बाबू के विशेष आग्रह पर मुख्यमंत्री 15 फरवरी 2018 को बटेश्वरस्थान गंगा पंप नहर परियोजना के उद्घाटन में आये थे और उन्हीं के यहां भोजन किए थे। इस बार सदानंद बाबू को श्रद्धांजलि देने उनके घर आये थे। राजनीति मतभेद रहने के बाद भी दोनों में अच्छे संबंध थे। मुख्यमंत्री सदानंद बाबू का कोई बात उठाते नहीं थे, जबकि 2005 में सदानंद सिंह एवं कांग्रेस द्वारा समर्थन नहीं दिए जाने पर नीतीश कुमार की सरकार गिर गई थी। बाद के उपचुनाव मे बहुमत हासिल कर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे। मुख्यमंत्री ने सदानंद बाबू से कई बार कहा था कि पुत्र शुभानंद मुकेश को जदयू में दें दे परंतु सदानंद बाबू पक्के कांग्रेसी थे। पुत्र को जदयू में नहीं जाने दिए। अब कहलगांव में चर्चा है कि शुभानंद मुकेश जदयू में जाएंगे। कांग्रेस से मोह भंग हो चुका है।

पहले हमें जाना चाहिए था पर वो चले गए : शोभाकांत मंडल

पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक शोभाकांत मंडल ने जैसे ही सदानंद बाबू के चित्र पर पुष्प अॢपत कर नमन करते हुए श्रद्धांजलि अॢपत की वैसे ही आंखों से आंसू छलक पड़े। मंडल ने कहा कि हम और सदानंद बाबू एक ही दिन एक समय पर कांग्रेस ज्वाइन किए थे। जिला कमेटी में सदस्य भी बने थे। दोनों की राजनीति अलग होने के बाद भी मित्रवत व्यवहार था। विधानसभा में वे हमें बताते भी थे। पहले हमें जाना चाहिए थे परंतु वो छोड़कर चले गए। आदमी आएगा, जाएगा परंतु यश नहीं जाता है। यहीं रह जाता है। इसी का फल है कि आज उनके घर पर बिहार सरकार चली आई है। सदानंद बाबू के साथ हमेशा सुख-दुख में रहने वाले पूर्व प्रमुख भोला प्रसाद साह भी रो रहे थे कि हे भगवान तुमने क्या कर दिया हमसे क्यों छीन लिया।

सदानंद बाबू के शांति भोज में दोपहर से देर रात तक लगी रही भीड़

सदानंद बाबू के शांति भोज में दोपहर से देर रात्रि तक भीड़ लगी रही। कहलगांव विधानसभा क्षेत्र के अलावा भागलपुर, गोड्डा जिला से भी हजारों कार्यकर्ता, शुभचिंतक एवं सगे-संबंधियों का जुटान हुआ था।

मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के आगमन को लेकर सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम

सदानंद सिंह के अंतिम श्राद्धकर्म के दिन मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रियों के आगमन और जुटने वाली भीड़ के मद्देनजर प्रशासन की ओर से सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया था। एनएच 80 पर पार्क चौक से बस स्टैंड तक बड़े छोटे वाहनों यहां तक कि बाइक परिचालन पर तथा कोल्ड स्टोरेज सदानंद बाबू के घर तक जाने वाले पथ पर वाहनों का प्रवेश वॢजत था। इसके लिए जगह-जगह वाहन पड़ाव बनाया गया था। यही नहीं मुख्यमंत्री को देखने के लिए शारदा पाठशाला मैदान के बाहर भीड़ लगी हुई थी।

सदानंद बाबू के जाने से कहलगांव में एक राजनीति युग का हुआ अंत

राजनीति के कद्दावर राजनेता रहे सदानंद सिंह के निधन से कहलगांव में एक राजनीति युग का अंत हो गया। कहलगांव विधानसभा क्षेत्र सदानंद सिंह के चलते कांग्रेस का 1969 से ही गढ़ रहा है। यहां का कांग्रेस का कार्यकर्ता अपने को सदानंदी कार्यकर्ता मानते थे। उनके इशारे पर भी लोक सभा में कार्यकर्ता मतदान करते थे। चाहे सुशील कुमार मोदी हो या सैयद शाहनवाज हुसैन, चुनचुन यादव को आंतरिक मदद किए थे। इसके चलते ये सदानंद बाबू का कभी विरोध नहीं किया करते थे। क्षेत्र में उनकी पैठ और पकड़ थी। अफसर भी इनसे हड़कते थे। जनता में भी लोकप्रिय थे। अपने क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयासरत रहते थे। एक बार लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमाए थे। हालांकि सफल नहीं हो पाए थे।

Edited By: Dilip Kumar Shukla