जागरण संवाददाता, मधेपुरा। जाप सुप्रीमो सह मधेपुरा के पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को अपहरण के एक 32 साल पुराने मामले में कोर्ट ने 14 दिन के न्यायिक अभिरक्षा में उप कारा बीरपुर भेज दिया है। उनकी पेशी कोर्ट में मंगलवार की रात्रि हुई। जहां से जेल भेज दिया गया। मालूम हो कि मंगलवार की सुबह पटना स्थित आवास से पूर्व सासंद की गिरफ्तार. की गई थी। डीएसपी सतीश कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने पूर्व सांसद को मधेपुरा लाया गया। जहां रात में ही कोर्ट में पेशी हुई।

गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के विरोध में पूर्व सांसद पप्‍पू यादव के समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता रोष प्रकट कर रहे हैं। समर्थकों ने कहा कि पप्‍पू यादव को साजिश के तहत जेल भेजा गया है। बिहार सरकार और भाजपा ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए यह किया है। समर्थकों ने कहा कि वे शीघ्र ही इस निर्णण के खिलाफ आंदोलन करेंगे। कल से आमरण उपवास और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

मालूम हो कि पप्पू यादव पर वर्ष 1989 के दौरान सूचक शैलेंद्र यादव ने मुरलीगंज थाना में राम कुमार यादव तथा उमाशंकर यादव के अपहरण किए जाने का मामला दर्ज करवाया था। करीब 32 साल पुराने मामले में पटना पुलिस ने पप्पू यादव को गिरफ्तार कर मधेपुरा पुलिस को सौंपा।

जानकारी के अनुसार पप्पू यादव पर चल रहे अपहरण के पुराने मामले में आपसी समझौता भी हो चुका था। लेकिन न्यायालय से बहुत पूर्व में ही पप्पू यादव के अनुपस्थित हो जाने पर वारंट निर्गत था। 22 मार्च को वारंट-कुर्की जारी किया गया था।

अचानक भाजपा नेता राजीव प्रताप रूढ़ी प्रकरण मामले के बाद पटना पुलिस ने पप्पू यादव को पटना आवास से गिरफ्तार कर लिया। पप्पू यादव के मधेपुरा पहुंचने पर जाप समर्थकों की भीड़ लग गई। पुलिस ने समर्थकों को दूर ही रोक रखा था। समर्थको का कहना था कि साजिश के तहत गिरफ्तारी की गई है। इस विपदा की घड़ी में गिरफ्तारी का औचित्य नहीं है।  गिरफ्तारी मामले को लेकर मधेपुरा में जाप कार्यकर्ता और समर्थकों में रोष है।