बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र समय पर बनवाएं; 2 साल की देरी पर अब कोर्ट का चक्कर, बिहार के सभी जिलों को निर्देश जारी
Bihar Birth Certificate New Rules: बिहार में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके ...और पढ़ें

Bihar Birth Certificate New Rules: जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को आप समझ लें।
HighLights
जन्म प्रमाण पत्र नियमों में बिहार में बड़ा बदलाव।
दो साल बाद पंजीकरण पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य।
नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से हुआ प्रभावी।
डिजिटल डेस्क, भागलपुर। Bihar Birth Certificate New Rules: बिहार में बच्चों और नागरिकों का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) बनवाने की प्रक्रिया को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। यदि किसी व्यक्ति के जन्म की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया जाता है, तो अब उसका निबंधन किसी प्रशासनिक पदाधिकारी या ब्लॉक-अनुमंडल स्तर से सीधे नहीं हो सकेगा। ऐसे मामलों में केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (Judicial Magistrate First Class) के अदालती आदेश के बाद ही जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।
भारत सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को बिहार में 1 अक्टूबर 2026 से लागू कर दिया गया है। इस बाबत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय (योजना एवं विकास विभाग) के मुख्य रजिस्ट्रार डॉ. नुरुल हक सिवानी ने सभी जिला पदाधिकारियों (डीएम) और संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश भेज दिए हैं।
फर्जीवाड़े पर रोक के लिए धारा 13 में हुआ बदलाव
स्कूलों में दाखिले, पासपोर्ट, सरकारी योजनाओं और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में जन्म प्रमाण पत्र की बढ़ती उपयोगिता को देखते हुए केंद्र सरकार ने मूल अधिनियम, 1969 की धारा 13 में संशोधन किया है। विलंबित निबंधन (देरी से रजिस्ट्रेशन) की आड़ में उम्र में हेरफेर करने के मामलों पर नकेल कसने के लिए यह सख्त व्यवस्था लागू की गई है।
कब किसके आदेश से बनेगा जन्म प्रमाण पत्र?
जन्म के एक वर्ष के बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर निबंधन के लिए जिला दंडाधिकारी (DM), अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO) या अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी का आदेश अनिवार्य होगा। इसमें स्थानीय स्तर पर स्थल व तथ्यों की जांच की जाएगी।
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जन्म प्रमाण पत्र: नया नियम एक नजर में
जन्म के 21 दिन तक: माता-पिता के आधार कार्ड और प्रसव प्रमाण पत्र (डिस्चार्ज स्लिप/बर्थ स्लिप) के साथ अस्पताल या स्थानीय निकाय में नि:शुल्क व आसान प्रक्रिया से।
1 वर्ष तक: स्थानीय जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया और विलंब शुल्क के साथ।
1 वर्ष से 2 वर्ष के भीतर: जिला पदाधिकारी (DM), अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) या अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी के आदेश से।
2 वर्ष से अधिक की देरी: केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के अदालती आदेश पर।
प्रभावी तिथि: 1 अक्टूबर 2026 से लागू।
आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
जन्म का प्रमाण: बच्चे का जन्म कहां हुआ, इसका प्रमाण- अस्पताल का प्रसव प्रमाणपत्र (डिस्चार्ज स्लिप) अथवा संबंधित चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाणपत्र।
माता-पिता के पहचान पत्र: माता और पिता दोनों का आधार कार्ड।
शपथ पत्र (हलफनामा): बच्चे की उम्र और समयावधि के अनुसार नोटरी/कार्यपालक दंडाधिकारी से बना एफिडेविट।
गवाहों का विवरण: तीन स्थानीय गवाह और उनका आधार नंबर। गवाह को हस्ताक्षर करना होगा।
तस्वीर: बच्चे की नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो।
आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया (Step-by-Step Process)
आवेदन फॉर्म भरना: जन्म प्रमाण पत्र का निर्धारित प्रपत्र प्राप्त कर उसमें सभी आवश्यक जानकारियां सही-सही भरें। कार्यालय आकर आवेदन फार्म प्राप्त करें।
दस्तावेजों का संलग्नीकरण: फॉर्म के साथ अस्पताल का जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता का आधार कार्ड, शपथ पत्र, तीन गवाहों के आधार नंबर और बच्चे की फोटो संलग्न करें।
हस्ताक्षर व सत्यापन: आवेदक को स्वयं नगर निगम कार्यालय आकर आवेदन फॉर्म पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होगा।
फॉर्म जमा करना व पावती लेना: सभी संलग्नकों सहित फॉर्म काउंटर पर जमा करें और भविष्य के संदर्भ के लिए आवेदन पावती रसीद (Acknowledgement Receipt/Number) अवश्य प्राप्त कर लें।
प्रमाण पत्र प्राप्त करना: आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद 15 दिनों के भीतर नगर निगम कार्यालय आकर मूल जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा सकता है।
वहीं, यदि जन्म की सूचना घटना के दो वर्ष बाद दी जाती है, तो आवेदक को न्यायालय की शरण में जाना होगा। सक्षम अधिकार क्षेत्र वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पूरी जांच-पड़ताल से संतुष्ट होने के बाद ही आदेश पारित किया जाएगा, जिसके आधार पर रजिस्ट्रार प्रमाण पत्र निर्गत करेंगे।
