भागलपुर [ललन तिवारी]। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विज्ञानियों के सात वर्ष के लंबे अनुसंधान के बाद धान की नई किस्म सबौर हीरा को विकसित करने में सफलता पाई है। नई किस्म जहां बिहार की धरती पर लहलहा कर किसानों को समृद्ध बनाएगी, वहीं दूसरे राज्यों में भी अपनी धमक कायम करेगी। राज्य सरकार इसे रिलीज कर चुकी है। जल्द केंद्र सरकार बिहार सहित पांच राज्यों के लिए रिलीज करने वाली है।

अर्थात यूं कहें कि धान की नई किस्म सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर के किसानों के लिए उपयोगी है। प्रसार शिक्षा निदेशक डा. आरके सोहाने ने बताया कि इस वर्ष से किसानों को इसके बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। उधर, चार राज्य कर्नाटक, ओडीशा, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में भी इस किस्म का सफलतापूर्वक ट्रायल चल रहा है।

धान की नई किस्म विकसित करने वाले वीर कुंवर सिंह कृषि महाविद्यालय डुमरांव बक्सर के विज्ञानी डा. प्रकाश सिंह कहते हैं कि नाटी मंसूरी के विकल्प के तौर पर किसानों को हीरा किस्म मिलेगी। सबौर हीरा में रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा है। गुणवत्तापूर्ण ज्यादा उत्पादन भी होगा। बाढ़ वाले इलाके में 15 दिनों तक पानी में रहने के बाद भी बेहतर उत्पादन देगा, जबकि कम सिंचाई में भी अच्छी उपज होगी। इसके पौधे की लंबाई 110 से 115 सेंटीमीटर होने के कारण पौधा हवा से गिरता नहीं है। पहले की किस्म नाटी मंसूरी की तुलना में इसकी उपज ज्यादा है। 70 से 80 ङ्क्षक्वटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन है जो सामान्य धान से डेढ़ गुना ज्यादा है।

डायबिटीज के मरीज के लिए उपयोगी

बताया गया कि इसमें आयरन, जिंक के साथ-साथ ग्लासेमिक इंडेक्स की मात्रा 60 से 65 होती है, जबकि अन्य किस्मों में 75 से 80 के बीच पाया जाता है। इस वजह से डायबिटीज के मरीज भी इसका इस्तेमाल कर पाएंगे। रोग प्रतिरोधक क्षमता नाटी मंसूरी और राजेंद्र मंसूरी से बेहतर है। इस कारण इसमें कीड़ों और रोग का प्रकोप कम होगा।

धान की नई किस्म सबौर हीरा किसानों के लिए लाभकारी होगी। आने वाले समय में किसान इसे अपनाएंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। - डा. अरुण कुमार , कुलपति बीएयू सबौर  

Edited By: Abhishek Kumar