संवाद सूत्र, चंद्रमंडी(जमुई)। बिहार-झारखंड सीमा पर अस्थित चकाई प्रखंड के सुदूरवर्ती और जंगली इलाके में सक्रिय नक्सलियों के स्लीपर सेल को ध्वस्त करने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा विशेष रणनीति बनाई गई है। हाल के तीन-चार वर्षों में देखा गया है कि नक्सलियों के प्रमुख नेता चिराग की पुलिस मुठभेड़ में मौत, सिद्धू कोड़ा की पुलिस हिरासत में तबियत खराब होने के कारण मौत के साथ ही इलाके में सक्रिय नक्सली दरोगी यादव, राजू यादव, मनोज सोरेन, मनोज मरांडी, बलदेव सोरेन जैसे नक्सलियों की गिरफ्तारी और एरिया कमांडर सुरंग यादव के आत्मसमर्पण के बाद नक्सली संगठन कमजोर पड़ गया है।

लेकिन नक्सलियों के स्लीपर सेल के रूप में काम करने वाले लोग नक्सली संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में खाद पानी का काम कर रहे हैं। बीते वर्ष 2021 में चकाई और चंद्रमंडी इलाके से तत्कालीन एसपी प्रमोद कुमार मंडल के नेतृत्व में सुरक्षाबलों ने एक दर्जन से भी अधिक सक्रिय नक्सलियों को गिरफ्तार किया था। जिससे इस इलाके में काफी हद तक नक्सली संगठन कमजोर पड़ गया था।

इसके बावजूद भी नक्सली संगठन के स्लीपर सेल के रूप में काम करने वाले लोग नक्सली संगठन की गतिविधियों को संचालित कर रहे हैं। नक्सलियों के स्लीपर सेल को ध्वस्त करने की विशेष रणनीति के तहत ही पिछले दिनों नक्सलियों के स्लीपर सेल के रूप में काम करने वाले प्रवेश दा के अहम सहयोगी शोभाकांत पांडे एवं ग्रामीण चिकित्सक श्याम बेसरा को गिरफ्तार किया गया।

शोभाकांत पांडे जहां 30 लाख के ईनामी नक्सली प्रवेश दा को लेवी की राशि इक_ा कर पहुंचाता था, वहीं श्याम बेसरा घायल और बीमार नक्सलियों का इलाज करता था। सुरक्षाबलों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि लगभग दो दर्जन से भी अधिक स्लीपर सेल से जुड़े नक्सली सहयोगियों को चिन्हित किया गया है जिन्हें गिरफ्तार करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। आने वाले दिनों में नक्सलियों पर नकेल कसने के लिए स्लीपर सेल से जुड़े लोगों को गिरफ्तार किया जाएगा।

नक्सलियों के सहयोगी और लाइनमेन के रूप में काम करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही सुदूरवर्ती और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्य को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए भी प्रयास किया जाएगा ताकि लोग नक्सलवाद को छोड़कर विकास के रास्ते पर चल सकें। - ओंकार नाथ सिंह, एसपी अभियान, जमुई। 

Edited By: Abhishek Kumar