बिहार में रिटायर्ड अभिलेखपाल की पेंशन में 65% कटौती, फर्जी दस्तावेज मामले में बड़ी कार्रवाई
भागलपुर जिला निबंधन कार्यालय में फर्जी दस्तावेज स्थापित करने के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। सेवानिवृत्त अभिलेखपाल ...और पढ़ें

रिटायर्ड अभिलेखपाल की पेंशन में 65% कटौती (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, भागलपुर। जिला निबंधन कार्यालय में वर्षों पुराने दस्तावेज से छेड़छाड़ कर फर्जी अभिलेख स्थापित करने के मामले में सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। तत्कालीन अभिलेखपाल संजय कुमार, जो वर्तमान में सेवानिवृत्त हैं, के विरुद्ध विभागीय जांच में कर्तव्यपालन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता और नियमों के उल्लंघन का आरोप प्रमाणित पाए जाने पर उनकी पेंशन में 65 प्रतिशत कटौती का दंड अधिरोपित किया गया है।
जांच में सामने आया कि दस्तावेज संख्या-15821, दिनांक 20 दिसंबर 1985 से संबंधित मूल अभिलेख को अभिलेखागार से हटाकर साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज को रिकार्ड में स्थापित किया गया। यह कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के नियम 3(1) के प्रतिकूल पाया गया।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि फर्जीवाड़ा प्रत्यक्ष रूप से संजय कुमार द्वारा ही किया गया, लेकिन उनके कार्यकाल में अभिलेखों का नियमित एवं प्रभावी पर्यवेक्षण नहीं किया जाना विभागीय लापरवाही के रूप में स्थापित हुआ।
विभागीय कार्रवाई के दौरान समाहर्ता-सह-जिला निबंधक द्वारा आरोप पत्र गठित किया गया था। स्पष्टीकरण एवं द्वितीय बचाव बयान प्रस्तुत किए जाने के बावजूद अनुशासनिक प्राधिकार ने इन्हें अस्वीकार कर दिया। जांच प्रतिवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि अभिलेखों का डिजिटाइजेशन वर्ष 2022–23 के दौरान हुआ, इसी अवधि में फर्जी दस्तावेज का अधिष्ठापन होने की संभावना जताई गई है।
अनुशासनिक प्राधिकार ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी अभिलेख की सुरक्षा और नियमित निगरानी अभिलेखपाल का मूल दायित्व है। इस दायित्व के निर्वहन में विफलता को गंभीर कदाचार मानते हुए बिहार पेंशन नियमावली 1960 के नियम 43(बी) के तहत यह दंड लगाया गया है।
इस निर्णय को सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को अभिलेखों की सुरक्षा और सरकारी कार्यप्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
